चुनाव आयोग ने शनिवार को कहा कि उसने ईवीएम चैलेंज में भाग लेने वाली माकपा और एनसीपी की आशंकाओं को दूर करने की पूरी कोशिश की है। मगर एनसीपी ने चुनाव आयोग की ईवीएम चैलेंज की प्रक्रिया पर सवाल उठाए है। उसने कहा है कि चैलेंज से पहले उसे आयोग ने उसके द्वारा मांगी गई जानकारियां नहीं दी। इसलिए वे इस पूरी कसरत को आंखों में धूल झोंकना कहते है।
शनिवार को चुनाव आयोग की ओर से बुलाए गए ईवीएम चैलेंज में माकपा और एनसीपी दोनों पार्टियों ने भाग लेने से इंकार किया। दोनों पार्टियों ने कहा कि वे चुनाव आयोग को चुनौती देने नहीं बल्कि ईवीएम की कार्यप्रणाली को समझने आए थे। मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी के मुताबिक माकपा ने ईवीएम चैलेंज को लेकर संतोष जताया। एनसीपी ने कहा कि उसने चुनाव आयोग से कहा था कि उसे चैलेंज से चार दिन पहले बैटरी और मैमोरी नंबर मांगा था। मगर उसे दिया नहीं गया। एनसीपी के इस आरोप पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चैलेंज के लिए लाई गई मशीन सील कवर में थी। उसे खोलकर बैटरी और मैमोरी नंबर लेना संभव नहीं था। हमने उन्हें चैलेंज वाले दिन ही दोनों नंबर देने को कहा।
जवाब में एनसीपी ने कहा कि इसकी जानकारी पहले से नहीं होने के चलते वे ईवीएम को चुनौती नहीं दे सकते। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि शनिवार को हमने एनसीपी को अपनी तकनीकी टीम से भी मिलाया। एनसीपी ने मशीन को लेकर आठ सवाल भी उठाए हैं। एनसीपी ने इसके बाद ईवीएम चैलेंज में भाग नहीं लेने का फैसला किया। जैदी ने कहा कि हम अभी भी उनकी हर आशंका को दूर करने के लिए तैयार है। उन्हें वापस आना चाहिए और खुद ईवीएम खोलकर बैटरी और मेमोरी नंबर लेकर ईवीएम को हैक करने की चुनौती स्वीकारनी चाहिए। उन्होंने कहा, हमने चैलेज में दो स्तर दिए थे। इसके तहत ईवीएम को छूना नहीं बल्कि खोलने तक का मौका दिया था।