भारत में दांत की बीमारियों गंभीरता से नहीं लेने का ही नतीजा है कि बीमारी बढ़ने पर मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। एक अध्ययन के मुताबिक भारत में प्रतिदिन दांत दर्द की वजह से हर दिन करीब 10 हजार बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। एम्स के दंत विभाग के चिकित्सकों ने अलग-अलग अध्ययनों के आधार पर यह दावा किया है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दंत विभाग के चिकित्सकों का कहना है कि देश के करीब 45 फीसदी स्कूली बच्चे किसी न किसी प्रकार की दांत की बीमारियों से पीड़ित हैं। इनमें से 25 फीसदी बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनमें से करीब 10 हजार बच्चे दांतों में दर्द अथवा अन्य परेशानी से प्रतिदिन स्कूल नहीं जा पाते। डॉक्टरों ने बताया कि इस संबंध में कर्नाटक में एक बड़ा अध्ययन किया गया, जिसके आधार पर यह आंकड़ा निकाला गया है।
एम्स के दंत विभाग के प्रमुख डॉ. ओ.पी. खरबंदा ने बताया कि पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है कि एम्स में इलाज कराने आने वाले ऐसे बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है। एम्स में 60 फीसदी ऐसे बच्चे आते हैं जिनकी उम्र 6 वर्ष या इससे भी कम होती है। ऐसे बच्चों के दांत शुरुआती दौर में गंदे और इसके बाद काले होने लगते हैं। इसके बाद दांतों में संक्रमण और दांत गिरने का खतरा बढ़ जाता है।