लू मार की झेल रहे उत्तर पश्चिम और मध्य भारत के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मानसून ने केरल में दस्तक दे दी है। अब आने वाले कुछ दिनों में मानसून देश के अन्य हिस्सों में भी पहुंच जाएगा। मानसून के आने के साथ ही कई राज्यों में जोरदार बारिश होगी, तो कई जगह छिटपुट बारिश के दौर चलेंगे। इससे अधिकांश राज्यों में मौसम खुशनुमा हो जाएगा।
तापमान कम होने की उम्मीद
मौसम विभाग ने 31 मई का तक मानसून की दस्तक देने का अनुमान लगाया था। लेकिन यह एक दिन पूर्व यानी 30 मई को ही भारत में आमद दे चुका है। केरल में मानसून आने के बाद से कई हिस्सों में मानसूनी हवाएं तेजी से पूर्वोत्तर की ओर बढ़ रही हैं। ऐसे में मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि अब पूरे देश में तापमान कम होगा। मौसम विभाग का कहना है कि केरल में मानसून आने के बाद अगले पांच दिन उत्तर पश्चिम और मध्य भारत का तापमान दो से चार डिग्री तक गिर सकता है।
जून में बढ़ सकती है परेशानी
हालांकि गर्मी से अभी भी राहत नहीं मिलेगी। दरअसल, इसकी वजह ये है कि जून माह में देश के उत्तरी पश्चिमी राज्य जैसे- हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली में इस बार दोगुने दिन लू चलने की आशंका है। आमतौर पर जून महीने में लू के दिन तीन होते हैं, जबकि इस बार कम-से-कम छह दिन हीटवेव चलने की आशंका है।
जून के पहले सप्ताह में मानसून दक्षिण-पूर्व-पूर्वोत्तर के राज्यों में छा जाएगा। इससे हवा में नमी बढ़ेगी, लेकिन हरियाणा, पंजाब, दिल्ली से लेकर मध्य भारत के राज्यों में आने वाली हवाएं उमस बढ़ाएंगी।
कहां-कहां होगी बारिश?
इधर, मानसून के केरल पहुंचने के बाद अपने तय रास्ते से पूर्वोत्तर की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। आठ जून तक मानसून दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्यों में पहुंच जाएगा। इसके बाद पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्यप्रदेश, दिल्ली और राजस्थान की तरफ आगे बढ़ेगा। मध्यप्रदेश में 15 जून तक मानसून की पहली लहर आने की संभावना है, जो इंदौर और आसपास से होकर गुजर जाएगी। 20 जून तक यहां मानसून की दूसरी लहर आ जाएगी। जबकि महाराष्ट्र में 10 जून, छत्तीसगढ़ में 15 जून, बिहार और झारखंड में 15 से 18 जून, यूपी में 20 जून तक मानसून आने की संभावना है। सबसे अंत में राजस्थान में 30 जून तक मानसून आने की संभावना है। मौसम के जानकार अनुमान लगा रहे हैं कि जून के अंत तक मानसून दिल्ली में दस्तक दे सकता है। आमतौर पर राजधानी में मानसून 27 जून के आसपास पहुंचता है।
इस वजह से जल्दी आया मानसून
मानसून की जल्दी एंट्री की एक वजह चक्रवात रेमल को भी माना जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि रविवार को पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश से गुजरे चक्रवात रेमल ने मानसून के प्रवाह को बंगाल की खाड़ी की ओर खींच लिया है, जो पूर्वोत्तर में मानसून के जल्दी आने का एक कारण हो सकता है।
ला-नीना कराएगा ज्यादा वर्षा
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रशांत महासागर में अभी अल नीनो की स्थिति बरकरार है, लेकिन 'तटस्थ' है। जुलाई के बाद ला-नीना सक्रिय हो जाएगा। ला-नीना वर्ष के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से अधिक मानसूनी वर्षा होती है। अलनीनो के दौरान प्रशांत महासागर का पानी गर्म रहता है, जो भारत में कमजोर मानसूनी हवाओं और शुष्क परिस्थितियों को प्रभावित करता है। ला-नीना इसके विपरीत है। इससे मानसून के दौरान अच्छी वर्षा होती है। आईएमडी भी इस बार सामान्य से अधिक वर्षा का पूर्वानुमान जारी कर चुका है।