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Andaman Nicobar: लोगों को आज भी डराती है 20 साल पहले आई सुनामी, जानें क्रिसमस के ठीक बाद कैसे मची थी तबाही

Wed, 25 Dec 2024 01:32 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पोर्ट ब्लेयर

सार

2004 की सुनामी में पोर्ट ब्लेयर से करीब 535 किलोमीटर दूर निकोबार जिले में सुनामी की वजह से सबसे ज्यादा तबाही हुई थी। कार निकोबार के तमालू गांव में 20 साल पहले हुई तबाही का मंजर आज भी नजर आता है।
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2004 में सुनामी से प्रभावित अंडमान-निकोबार का हादूस पोर्ट। - फोटो : PTI
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विस्तार
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अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में 20 साल पहले आई भयानक सुनामी की यादें आज भी लोगों के जहन में ताजा हैं। इस घटना में 400 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी, जबकि 3000 से अधिक लोग लापता हो गए थे। अंडमान-निकोबार के कैंपबेल बे और कार निकोबार में तबाही का मंजर इतना भयानक था कि लोग आज तक स्कूल, चर्च और सरकारी संस्थानों की तबाही की वजह से इकट्ठा हुए मलबे को देखकर भयभीत हो जाते हैं।
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2004 की सुनामी में पोर्ट ब्लेयर से करीब 535 किलोमीटर दूर निकोबार जिले में सुनामी की वजह से सबसे ज्यादा तबाही हुई थी। कार निकोबार के तमालू गांव में 20 साल पहले हुई तबाही का मंजर आज भी नजर आता है। हर साल निकोबारी आदिवासी समूह यहां 'मौत घर' में जुटते हैं और सुनामी में खोए अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों को याद करते हैं। 

लोगों ने बयां किय 20 साल पुराना खौफ का मंजर
तमालू गांव के मुखिया पॉल बेंजामिन ने याद करते हुए बताया क्रिसमस के जश्न के बाद हम स्थानीय चर्च में प्रार्थनाओं के लिए जुट रहे थे। हम सभी त्योहार के मूड में थे। 26 दिसंबर को सुबह करीब 6 बजे हमने देखा कि समुद्री तटों से लहरें तीन किलोमीटर तक अंदर चली गईं। इसके बाद आए जबरदस्त भूकंपों से पूरा द्वीप कांप गया। हमने कभी प्रकृति का गुस्सा नहीं देखा था। इसकी कोई चेतावनी प्रणाली भी नहीं थी और कुछ मिनटों बाद ही हमने समुद्र की दैत्याकार लहरों को अपनी तरफ आते देखा। हमने इसके बाद पहाड़ी क्षेत्रों में भागकर अपनी जान बचाने की कोशिश की।
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उन्होंने कहा कि सुनामी के बाद हर तरफ अराजकता का माहौल था। लोग सुरक्षित जगहें ढूंढ रहे थे। इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह रही थीं। कुछ लोग भूकंप के भीषण झटकों के चलते बेहोश हो गए थे। मैंने अपनी पत्नी, जो कि किचन में थीं, को बाहर निकाला और हम सब पहाड़ी क्षेत्र के जंगलों की शरण में चले गए। लोग यहां राशन मांग रहे थे, ताकि अपने बच्चों को खाना खिला सकें। हमारे पास कुछ भी खाने के लिए नहीं था। जो भी राशन था, वह हमने बच्चों और मरीजों के लिए छोड़ दिया। बाकी सभी लोग नारियल पानी पर जीने को मजबूर थे। 

दूसरी तरफ कैम्पबेल बे के लक्ष्मी नगर के ग्राम पंचायत प्रधान प्रहलाद सिंह ने कहा, "मैंने सुनामी में अपने कुछ करीबी दोस्तों को खो दिया। मैं अपने घर के बाहर खड़ा था तभी मुझे तेज झटके महसूस हुए। हमारे घर के सामने जंगल था और हम समुद्र नहीं देख पा रहे थे। फिर, मैं एक नारियल के पेड़ पर चढ़ गया और देखा कि विशाल लहरें हमारे द्वीप की ओर तेजी से बढ़ रही हैं।"

कचल द्वीप पर सबसे ज्यादा 1635 लोग थे लापता
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सुनामी की वजह से पोर्ट ब्लेयर से 274 किमी दूर कार निकोबार में 269 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 583 लोग लापता हुए। इसके अलावा टेरेसा द्वीप पर 54 की मौत हुई और छह लापता थे। चौड़ा में 41 की मौत और 17 लापता, कैंपबेल बे में 20 की मौत और 520 लापता थे। इसके अलावा निकोबाल जिले के कचल द्वीप पर सबसे ज्यादा 1635 लोग लापता थे। यहां मौत का आंकड़ा एक ही था। इसके अलावा कमोरता और त्रिंकेत द्वीप में क्रमशः 295 और 75 लोग गायब थे। यहां भी एक-एक व्यक्ति की मौत हुई थी। 
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