यूरोपीय संघ (ईयू) ने सोमवार को भारत से आग्रह किया है कि यहां की सरकार यूरोपीय संघ के कई देशों के साथ अपने द्विपक्षीय निवेश समझौते को छह महीने का और विस्तार दे। अन्यथा ऐसे समझौतों की अनुपस्थिति में विभिन्न व्यापार समझौतों और मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से संबंधित वार्ता पर नकारात्मक असर पड़ेगा। यूरोपीय संघ के कई देशों के साथ हुए भारत के समझौते की अवधि जल्द ही खत्म होने वाली है।
यूरोपीय संसद का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल भारत आया हुआ है। प्रतिनिधि मंडल अमेरिका के ट्रंप प्रशासन पर भारत का रुख जानना चाहता है और साथ ही भारत-ईयू समझौते से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी बात करना चाहता है। प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू एवं कश्मीर की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि भारत व पाकिस्तान के बीच संबंध बेहतर होने चाहिएं।
प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष जियोफ्रे वान ऑर्डेन ने कहा कि ईयू चाहता है कि भारत अवरुद्घ एफटीए वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए पहले निवेश समझौतों का नवीनीकरण करे। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि यदि व्यापार और निवेश समझौतों को छह महीने का विस्तार दिया जाए, तो यह मददगार होगा। यह मुद्दा एफटीए वार्ता में एक समस्या बनी हुई है। नीदरलैंड के साथ भारत के वर्तमान व्यापार और निवेश समझौते नवंबर में अप्रभावी हो चुके हैं। कई अन्य ईयू देशों के साथ भारत के ऐसे समझौते आने वाले कुछ महीनों में अप्रभावी होने वाले हैं।
ऑर्डेन ने कहा कि इन समझौतों के अप्रभावी होने से ईयू देशों के लिए भारत में नया निवेश करना कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ईयू चाहता है कि भारत पहले इन समझौतों की प्रभाव अवधि को विस्तार दे और उसके बाद एफटीए वार्ता पर कदम बढ़ाए। भारत और ईयू के बीच प्रस्तावित एफटीए का नाम है ‘ईयू-इंडिया ब्रॉड-बेस्ड ट्रेड एंड इनवेस्टमेंट एग्रीमेंट’ (बीटीआईए)।