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Tomas Niklasson: EU के राजदूत का भारत दौरा समाप्त, अफगानिस्तान की स्थिति पर वार्ताकारों से की व्यापक बातचीत

Sun, 12 Feb 2023 02:37 AM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

निकलासन की भारत यात्रा ऐसे समय में हुई, जब तालिबानी शासन द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताएं हैं, जिसमें अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए विश्वविद्यालय शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने का फैसला भी शामिल है।
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Tomas Niklasson - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अफगानिस्तान के लिए यूरोपीय संघ के विशेष दूत टॉमस निकलासन ने पिछले दो दिनों में अपने भारतीय वार्ताकारों के साथ युद्धग्रस्त देश की समग्र स्थिति पर व्यापक बातचीत की, जिसमें इसकी धरती से पैदा आतंकवाद का खतरा भी शामिल है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने शनिवार को यह बात कही।

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निकलासन की भारत यात्रा ऐसे समय में हुई, जब तालिबानी शासन द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताएं हैं, जिसमें अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए विश्वविद्यालय शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने का फैसला भी शामिल है। इन लोगों ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) के अधिकारियों के साथ बातचीत में काबुल में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर प्रमुखता से चर्चा हुई। 

काबुल से खबरें हैं कि कुछ विदेशी मिशन बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर अपने राजनयिकों को वापस बुला रहे हैं। सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने मॉस्को में एक सुरक्षा वार्ता में भाग लिया, जो अफगानिस्तान की समग्र स्थिति पर केंद्रित थी। बैठक में अपने संबोधन में डोभाल ने कहा कि किसी भी देश को आतंकवाद के निर्यात के लिए अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और भारत जरूरत के समय अफगानिस्तान के लोगों को कभी नहीं छोड़ेगा।
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भारत ने अभी तक अफगानिस्तान में तालिबान शासन को मान्यता नहीं दी है और काबुल में वास्तव में समावेशी सरकार के गठन की वकालत कर रहा है। भारत ने जोर देकर कहा है कि अफगान धरती का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ कोई भी आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। 

भारत, अफगानिस्तान में मानवीय संकट से निपटने के लिए उसे बेरोकटोक मानवीय सहायता मुहैया कराने पर जोर देता रहा है। पिछले साल जून में भारत ने अफगानिस्तान की राजधानी में अपने दूतावास में एक तकनीकी टीम तैनात करके काबुल में अपनी राजनयिक मौजूदगी को फिर से स्थापित किया। तालिबान ने 15 अगस्त 2021 को काबुल पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए भारत ने दूतावास से अपने अधिकारियों को वापस बुला लिया था। निकलासन ने शनिवार सुबह अपनी भारत यात्रा समाप्त की।

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