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Study: इथेनॉल से बढ़ेगी किसानों की आय, तेल आयात पर घटेगी निर्भरता; JNU-ICSSR की रिसर्च में क्या बोले विशेषज्ञ?

Sun, 19 Jul 2026 07:41 AM IST
ज्योति भास्कर ललित कौशिक, अमर उजाला।

सार

एक अध्ययन के मुताबिक इथेनॉल से किसानों की आय बढ़ेगी। इसके अलावा तेल आयात पर भारत की निर्भरता घटाने में भी मदद मिलेगी। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के सहयोग से शोध किया है। इसमें ये जानकारी सामने आई है।
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क्रूड की कीमतों के मद्देनजर सरकार ने इथेनॉल पर लिया अहम फैसला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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ऑटोमोबाइल क्षेत्र में इथेनॉल आधारित ईंधन का विस्तार न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है। यह जानकारी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप द्वारा किए अध्ययन में सामने आई है।

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यह अध्ययन भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से जेएनयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ब्रजेश कुमार तिवारी के नेतृत्व में किया गया है। इस शोध का विषय भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के विकास पर मेक इन इंडिया का प्रभाव था। इस अध्ययन में दिल्ली-एनसीआर के ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़े 300 से अधिक प्रतिभागी सहित उद्योग से जुड़े पेशेवरों, आपूर्तिकर्ताओं, उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों को शामिल किया गया।

कृषि उत्पादों से इथेनॉल उत्पादन से अर्थव्यवस्था होगी मजबूत
डॉ. ब्रजेश कुमार तिवारी ने बताया कि अध्ययन में सामने आया कि देश का ऑटोमोबाइल क्षेत्र इलेक्ट्रिक वाहनों, हाइब्रिड तकनीक, इथेनॉल आधारित ईंधन, वाहन सुरक्षा की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इथेनॉल आधारित ईंधन को किसानों की आय, ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से इथेनॉल उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा कर सकता है।
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वाहनों की माइलेज और सुरक्षा की जानकारी में हो पारदर्शिता
उन्होंने बताया कि अध्ययन में 85.6 फीसदी उत्तरदाताओं ने ऑटोमोबाइल कंपनियों में मेक इन इंडिया पहल का समर्थन किया। जबकि 78 फीसदी ने भारत में निर्मित वाहनों की विशेषताओं के बारे में उपभोक्ताओं को जागरूक करने की वकालत की। जिससे भारतीय वाहनों की गुणवत्ता, सुरक्षा, तकनीक, माइलेज, रखरखाव लागत और पर्यावरणीय विशेषताओं के बारे में पारदर्शी जानकारी उपलब्ध हो सकें। साथ ही वाहन सुरक्षा मानकों, भारत एनसीएपी रेटिंग, अधिक एयरबैग, मजबूत क्रैश सुरक्षा और पारदर्शी परीक्षण व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
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इथेनॉल मिश्रित ईंधन के प्रभाव की मिले स्पष्ट जानकारी
अध्ययन में इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देते समय उपभोक्ताओं को वाहन अनुकूलता, माइलेज, रखरखाव लागत और दीर्घकालीन प्रभावों के बारे में स्पष्ट जानकारी दिए जाने की मांग भी सामने आई। अध्ययन में मेक इन इंडिया पहल को लेकर कुल प्रतिक्रियाओं में 59.7 फीसदी उत्तरदाताओं ने सहमति या पूर्ण सहमति व्यक्त की। जबकि 35.8 फीसदी प्रतिक्रियाएं तटस्थ रहीं। केवल 4.6 फीसदी प्रतिक्रियाएं असहमति या पूर्ण असहमति की श्रेणी में दर्ज की गई।

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