संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में अधिक संख्या में महिलाओं को शामिल करना जरूरी है क्योंकि वे लैंगिक हिंसा से निपटने, विश्वास कायम करने और संवाद को बढ़ावा देने में बेहतर ढंग से सक्षम हैं। यह बात राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को कही।
राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में योगदान के भारत के गौरवशाली इतिहास को याद किया। भारत के 2,90,000 (2.90 लाख) से अधिक शांति सैनिकों ने 50 से अधिक मिशनों में अपनी सेवा दी है। मुर्मू ने कहा, "आज, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए, नौ सक्रिय मिशनों में 5,000 से अधिक भारतीय शांति सैनिक तैनात हैं, जो अक्सर प्रतिकूल परिस्थितियों में भी तैनात रहते हैं।" राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय महिला शांति सैनिक अपने कर्तव्य के निर्वहन में आगे रहीं हैं।
राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, महिला शांति सैनिक "शांति स्थापना में महिलाएं: एक वैश्विक दक्षिण परिप्रेक्ष्य" विषय पर एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में हैं, जिसका आयोजन विदेश मंत्रालय की ओर से रक्षा मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र, नई दिल्ली के साथ साझेदारी में किया जा रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक दक्षिण की महिला अधिकारियों को एक मंच पर लाकर शांति स्थापना से जुड़ी समकालीन प्रासंगिक मुद्दों और शांति स्थापना मिशनों के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों पर चर्चा करना है।