जीएसटी अधिकारियों ने एस्सेल समूह की कंपनियों को मुखौटा कंपनियों के जरिये 392 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) जारी करने के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति के बिना आईटीसी जारी किया।
केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) आयुक्तालय, दिल्ली (पूर्व) के अधिकारियों ने फर्जी कंपनियों के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। इन कंपनियों का संचालन नरेश ढौंडियाल चार्टर्ड अकाउंटेंट देवेंद्र कुमार गोयल के साथ मिलकर कर रहा था।
वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ढौंडियाल और गोयल दोनों एस्सेल समूह के पूर्व कर्मचारी हैं। हालांकि दोनों का मौजूदा समय में समूह से कोई जुड़ाव नहीं है लेकिन वे एस्सेल समूह को आईटीसी जारी कर रहे थे। मुखौटा और फर्जी कंपनियों के जरिये एस्सेल समूह को सामान और सेवाओं की आपूर्ति किए बिना आईटीसी जारी करने के लिए कई मुखौटा कंपनियों का गठन किया गया था।
मंत्रालय ने कहा कि यह काम एस्सेल समूह को गलत तरीके से आईटीसी जारी करने, आयकर से बचने के लिए खर्च दिखाने और कंपनियों के शेयर मूल्य बढ़ाने के लिए कारोबार को बढ़ाकर दिखाने के लिए किया गया। ढौंडियाल ने जहां एस्सेल समूह के लिए कई मुखौटा कंपनियां बनाईं, वहीं गोयल ने अन्य मुखौटा कंपनियों के जरिये फर्जी इनवॉयस या बिलों की व्यवस्था की।
सीजीएसटी ने की कार्रवाई, आरोपियों को 14 दिन की की न्यायिक हिरासत में भेजा गया
ढौंडियाल और गोयल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस मामले में आगे जांच जारी है। जीएसटी सेंट्रल टैक्स, दिल्ली जोन अब तक विभिन्न मामलों में 30 लोगों को गिरफ्तार कर चुका है और इन मामलों में 4450.86 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी पकड़ी गई है।