ओ पनीरसेल्वम के नेतृत्व वाले धड़े ने सोमवार को इरोड (पूर्व) विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव को न लड़ने की घोषणा की। इस अहम घटनाक्रम के बाद अन्नाद्रमुक में के पलानीस्वामी की पार्टी में स्थिति मजबूत हो सकती है। उपचुनाव के लिए मतदान इसी महीने 27 फरवरी को होना है।
पनीरसेल्वम के समर्थकों के पी कृष्णन और वैथिलिंगम ने कहा कि के एस थेन्नारासु के समर्थन में सेंथिल मुरुगन की उम्मीदवारी वापस नहीं ले रहे हैं। पार्टी ने चुनाव न लड़ने का फैसला किया, चूंकि वह चाहते हैं कि दो पत्ती वाला चुनाव चिह्न जीते।
यह पूछे जाने पर कि क्या इस तरह के फैसले से अन्नाद्रमुक उम्मीदवार को चुनाव जीतने में मदद मिलेगी, कृष्णन ने कहा, नाम वापस लेने का मकसद चुनाव आयोग को अन्नाद्रमुक को दो पत्ती वाला चुनाव चिह्न उपलब्ध कराना है। हमें थेन्नारासु की कोई चिंता नहीं है।
कृष्णन ने कहा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि पार्टी की ओर से कौन चुनाव लड़ता है। हम चाहते हैं कि एआईएडीएमके उपचुनाव जीते और हम पार्टी के चुनाव चिह्न के आधार पर वोट हासिल करेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम ने यह फैसला भाजपा की उस अपील के मद्देनजर लिया है जिसमें उन्होंने द्रमुक समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार को हराने के लिए साझा उम्मीदवार खड़ा करने की अपील की थी।
नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि की पूर्व संध्या पर नाम वापस लेने के फैसले से पलानीस्वामी खेमे में भी काफी चहल-पहल देखी गई। थेन्नारासु को समर्थन पत्रों के साथ स्थायी समिति के अध्यक्ष तमिल मगन हुसैन उम्मीदवार के चयन और पार्टी के चुनाव चिह्न को बरकरार रखने के लिए आम परिषद के सामूहिक फैसले पर चुनाव आयोग को समझाने के लिए सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे।
इस बीच हुसैन ने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग अन्नाद्रमुक के पक्ष में फैसला करेगा। उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार हमने पूर्व विधायक थेन्नारासु की उम्मीदवारी का समर्थन करने वाले आम परिषद के सदस्यों की सहमति प्राप्त की और दस्तावेज जमा किए। हमें उम्मीद है कि आयोग हमारे पक्ष में फैसला करेगा।
राज्य के पूर्व मंत्री सी वी षणमुगम ने कहा कि 2,665 सदस्यीय मजबूत आम परिषद में से करीब 2,501 ने थेन्नारासु की सिफारिश की है। उन्होंने पनीरसेल्वम खेमे द्वारा अपना उम्मीदवार वापस लेने की घोषणा पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।