केंद्रीय कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पीएफ खाते से पैसा निकालने को आसान बना दिया है। अब चिकित्सा के साथ साथ घर, शिक्षा और बच्चों के विवाह के लिए भी कर्मचारी भविष्य निधि से पैसे निकाले जा सकते हैं।
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अब पैसे निकालने के लिए केवल एक फॉर्म भरना होगा और सेल्फ डिक्लेरेशन देना होगा। श्रम मंत्रालय ने पीएफ एक्ट के क्लॉज 68जे व 69एन में बदलाव किया है। इसके तहत खाताधारक जो भी पैसा अपने पीएफ अकाउंट से निकालेंगे वो वापस नहीं करना होगा।
जानिए इससे जुड़ी 10 खास बातें-
- केंद्रीय कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के इस फैसले से करीब 4 करोड़ खाताधारकों को लाभ मिलेगा।
- इस फैसले से अब टीबी, कुष्ठ रोग, पक्षाघात, कैंसर, मानसिक बीमारी या बड़े ऑपरेशन के लिए एडवांस में पैसा निकाला जा सकता है। इलाज में 1 महीने का समय लगने पर भी पैसा निकाला जा सकता है।
- इससे पहले पैसे निकालने के लिए अस्पताल के एक डॉक्टर से प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होता था कि वो या उनके आश्रित को अस्पताल में भर्ती किया गया है या एक महीने या इससे अधिक के समय के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत होती थी।
- लेकिन अब पीएफ खाते से इलाज के लिए पैसा निकालने में डॉक्टर का सर्टिफिकेट पहले जमा कराने की बाध्यता को खत्म कर दिया है।
- इलाज के लिए अब 6 महीने तक की सैलरी को निकाला जा सकता है।
- अब घर या जमीन खरीदने के लिए 90 प्रतिशत सैलरी को निकाला जा सकता है इसके अलावा घर के लिए कर्ज के ईएमआई के भुगतान के लिए धन निकाला जा सकेगा।
- बच्चों के विवाह के अलावा उनकी शिक्षा के लिए आंशिक प्रोविडेंट फंड निकाला जा सकता है।
- अब केवल एक फॉर्म भरने के बाद सेल्फ डिक्लेरेशन देकर धन निकाला जा सकता है।
- इन सबके अलावा अब विकलांगता उपकरण खरीदने के लिए भी धन निकाला जा सकता है।
- अब भविष्य निधि से धन निकालने के बाद उसे वापस करने की भी जरूरत नहीं होगी।