पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) ने पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में पराली के जलने से प्रदूषण को कम करने की केंद्र सरकार की योजना से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के क्रियान्वयन की स्थिति का उल्लेख किया गया है।
दिल्ली सरकार पूसा की तकनीक का इस्तेमाल करेगी: केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार खेतों में पराली जलाने की जरूरत को कम करने के लिए एक तकनीक का इस्तेमाल कर घोल बनाने के वास्ते पांच अक्टूबर से पूसा अनुसंधान संस्थान के साथ काम करेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार पूसा संस्थान द्वारा बनाए गए घोल का इस्तेमाल 800 हेक्टेयर भूमि पर छिड़काव के लिए करेगी।
उन्होंने एक ऑनलाइन ब्रीफिंग में कहा कि ‘एग्री मिक्स कैप्सूल’ बनाने का काम 12-13 अक्तूबर तक पूरा होने की संभावना है। इन कैप्सूलों में से चार को तरल पदार्थ के साथ मिलाया जा सकता है और एक हेक्टेयर भूमि पर छिड़काव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को पूसा अनुसंधान संस्थान के मार्गदर्शन में निष्पादित किया जायेगा और और पूरी परियोजना के कार्यान्वयन की लागत 20 लाख रुपये से कम है।
घोल पराली को खाद में बदलेगा
उन्होंने कहा कि ‘हम किसानों के घरों में जाएंगे और अगर वे तैयार हैं, तो हम इस घोल का इस्तेमाल करेंगे। घोल पराली को नरम करेगा और धीरे-धीरे इसे खाद में बदल देगा।’ केजरीवाल ने कहा कि ‘इससे उत्पादकता बढ़ाने के अलावा, कृषि भूमि में उर्वरक के उपयोग में कमी आएगी।’
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पराली जलाया जाना हर साल विशेषकर सर्दी के महीनों में प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि ‘कोरोना वायरस के समय में प्रदूषण खतरनाक हो सकता है और राज्य सरकारों को समाधान खोजने की दिशा में काम करना चाहिए। पूसा अनुसंधान संस्थान ने एक किफायती समाधान खोजा है।’ उन्होंने कहा कि सरकार ने इसके लिए सभी व्यवस्थाएं की हैं, और यह प्रक्रिया पांच अक्तूबर से शुरू होगी।