जहरीले कीटनाशक एंडोसल्फान के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए दो अक्तूबर से भूख हड़ताल कर रही सामाजिक कार्यकर्ता दया बाई की मांगों को केरल सरकार ने मान लिया है। करीब पंद्रह दिन बाद केरल सरकार ने रविवार को कहा कि वह दया बाई की 90 फीसदी मांगो को मानने के लिए तैयार हैं। हालांकि सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि जब तक सरकार इस बारे में उन्हें कोई लिखित आश्वासन नहीं देती है, तब तक वह अपनी हड़ताल से पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले भी सरकार से इस तरह के जुबानी आश्वासन मिल चुके हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता दया बाई ने कासरगोड जिले के एंडोसल्फान पीड़ितों के लिए न्याय की मांग को लेकर राज्य सचिवालय के सामने दो अक्तूबर को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उन्होंने केरल सरकार पर आरोप लगाया था कि राज्य की पिनराई विजयन सरकार एंडोसल्फान के पीड़ितों के प्रति उदासीन है। पिछले कई दिनों से चल रही भूख हड़ताल के बाद रविवार को राज्य की मंत्री आर बिंदू और वीना जॉर्ज ने दया बाई से मुलाकात की। दोनों मंत्रियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी सभी मांगों को पूरा किया जाएगा। हालांकि बात-चीत के बाद सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि जब तक सरकार इस बारे में उन्हें कोई लिखित आश्वासन नहीं देती है, तब तक वह अपनी हड़ताल से पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने कहा कि पहले भी सरकार ने इस तरह के आश्वासन दिए थे, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ।
गौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्ता दया बाई ने कासरगोड जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि वहां एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित किया जाए। उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों में देखभाल केंद्र, एंडोसल्फान पीड़ितों के लिए विशेष चिकित्सा शिविर और अपाहिज रोगियों के लिए घर पर देखभाल के प्रावधान की भी मांग की थी।
राज्य सरकार की मंत्रियों के मिलने से पहले, भूख हड़ताल शुरू करने के दो दिनों बाद ही चार अक्तूबर को उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके कारण उन्हें एक अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था। हालांकि, डिस्चार्ज होने के तुरंत बाद दया बाई ने अपना सत्याग्रह फिर से शुरू कर दिया था। इसके बाद आठ अक्तूबर को विपक्ष के नेता वी डी सतीसन ने दया बाई से मुलाकात की और उन्हें अपना समर्थन देने का वादा किया था। साथ ही केरल सरकार की आलोचना की थी। उनके अलावा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नीथला ने भी दया बाई से मुलाकात की थी।
बता दें कि केरल में 2011 तक काजू, कपास, चाय, धान, फलों और अन्य फसलों पर एंडोसल्फान (एक ऑर्गेनोक्लोरिन कीटनाशक और एसारिसाइड) का व्यापक रूप से उपयोग किया गया था। इसके बाद इसके दुष्परिणामों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसके उत्पादन और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया था।