पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले में दलितों ने लगभग तीन शताब्दियों से चली आ रही जातीय भेदभाव की बेड़ियां तोड़ दीं। 130 दलित परिवारों के एक प्रतिनिधि मंडल ने बुधवार को पहली बार गिधेश्वर शिव मंदिर में कदम रखा और पूजा अर्चना की। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। कहा कि गिधग्राम के दासपारा इलाके से दास परिवारों की चार महिलाओं समेत पांच श्रद्धालुओं ने सुबह करीब 10 बजे मंदिर की सीढ़ियां चढ़ीं। उन्होंने शिवलिंग पर दूध-जल चढ़ाया और महादेव की निर्बाध पूजा की।
इस दौरान स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस थाने के कर्मी मौजूद थे। इन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंदिर के आसपास तैनात किया गया था। मोची और बुनकर समुदाय से संबंधित इन लोगों का आरोप था कि मंदिर समिति और अन्य ग्रामीण उन्हें दलित होने के कारण क्षेत्र के एकमात्र उपासना स्थल गिधेश्वर शिव मंदिर में नहीं घुसने देते। हाल ही में उन्होंने प्रशासन से इस भेदभाव को समाप्त करने की गुहार लगाई थी।
पूजा के बाद खुशी जताते हुए दलित परिवारों ने प्रशासन और पुलिस का सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। संतोष दास नामक एक ग्रामीण ने कहा, हम मंदिर में पूजा करने का अधिकार मिलने से बहुत खुश हैं। मैंने भगवान से सभी की भलाई के लिए प्रार्थना की।