पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने विभिन्न देशों के राजदूतों से संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि कुछ देश भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटन ठीक नहीं मानते हैं। वे यहां आने वाले अपने पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हैं। इस धारणा को हमने बदलने का प्रयास किया है। असम सरकार इस मामले को लेकर विभिन्न देशों के राजदूतों के संपर्क में है। उन्होंने यह भी कहा कि मणिपुर में हो रही हिंसा का पूर्वोत्तर के सातों राज्यों के पर्यटन क्षेत्र पर कोई असर नहीं पड़ा है।
सरमा ने दावा किया कि कुछ घटनाओं छोड़कर पूर्वोत्तर क्षेत्र के अधिकांश राज्य उग्रवाद और कानून-व्यवस्था के मुद्दे से मुक्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार-पांच सालों में असम में कोई हिंसा नहीं हुई है। लेकिन फिर भी कई देश पूर्वोत्तर को प्रतिबंधित श्रेणी में मानते हुए अपने पर्यटकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी करते हैं। इसे लेकर हम लगातार दूतावासों के संपर्क में हैं। विदेशी पर्यटकों को यहां लाने के लिए इस धारणा को बदलना हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न देशों के राजदूतों को यहां आमंत्रित करती रहती है। इस प्रक्रिया में केंद्र सरकार की भी मदद मिल रही है। सरमा ने कहा कि मुझे लगता है कि धारणा बदलने में कुछ और समय लगेगा। अमेरिका और जापान जैसे देशों ने अपने नागरिकों के पूर्वोत्तर की यात्रा करने पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इसलिए राज्य और क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की आमद से पहले धारणा को बदलना जरूरी है। सीएम ने कहा कि असम में पिछले एक साल में 10 लाख पर्यटक आए, जिनमें 27,700 विदेशी शामिल थे।
काजीरंगा में 12वें अंतरराष्ट्रीय पर्यटक मार्ट का उद्घाटन करने आए केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी सरमा का समर्थन किया। शेखावत ने कहा कि कार्यक्रम को यहां आयोजित करने का एक और कारण है। यहां आने वाले लोग सुंदरता, शांति और विकास कार्यों को देखने के बाद सकारात्मक बातें लिखेंगे। मैं ब्लॉगर्स से कहता हूं कि वे इस कार्यक्रम को प्रदर्शित करें और अपने मंच पर लिखें कि आपने यहां क्या अनुभव किया है? इससे धारणा बदलने में मदद मिलेगी।
मणिपुर हिंसा का कोई असर नहीं
सरमा ने कहा कि मणिपुर असम से 800 किमी दूर है। हिंसा वाली जगह तक पहुंचने में दो दिन लगेंगे। अब क्या राजस्थान में कोई कार्यक्रम हरियाणा के लिए एक झटका है? पूर्वोत्तर के भूगोल को समझना जरूरी है। मणिपुर और असम सांस्कृतिक रूप से एक हैं, लेकिन अलग-अलग राज्य हैं। पूर्वोत्तर के लोग तब निराश होते हैं जब मणिपुर को काजीरंगा से जोड़ने की कोशिश होती है। असम के बहुत से लोग अपने पूरे जीवनकाल में कभी मणिपुर नहीं गए हैं। मणिपुर की घटनाओं को काजीरंगा और मानस राष्ट्रीय उद्यान से जोड़ना अन्याय है। मणिपुर की हिंसक घटनाओं का पूर्वोत्तर के अन्य सात राज्यों के पर्यटन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने भी कहा कि गलत धारणा को तोड़ने की जरूरत है।
पीएम ने पर्यटक वीजा में दी छूट: शेखावत
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यटन के लिए भारत आने वाले लोगों के लिए वीजा में छूट की घोषणा की है। इस पहल से पूरे देश में, खासकर पूर्वोत्तर में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन क्षेत्र के विकास में बुनियादी ढांचे की महत्वपूर्ण भूमिका है। पिछले 10 वर्षों में एनडीए सरकार ने सड़क नेटवर्क को विकसित किया है। पूर्वोत्तर हमारे देश का सबसे खूबसूरत हिस्सा है, फिर भी इसे कम खोजा गया है। यह भारत का छिपा हुआ रत्न है।
सरमा ने रखे अहम प्रस्ताव
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्रीय मंत्री के सामने कई प्रस्ताव रखे। उन्होंने कहा कि हमारे पास हवाई अड्डे हैं, लेकिन उड़ानें बहुत कम हैं। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। पूर्वोत्तर में कठिन स्थानों तक सड़कें बन रही हैं। इन परियोजनाओं को पूरा करने में 4-5 साल और लग सकते हैं, फिर हमें बढ़ावा मिलेगा। सरमा ने नई दिल्ली या गुवाहाटी में एक केंद्रीय पर्यटन संग्रहालय का भी प्रस्ताव रखा। अगले 10 वर्षों में असम में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।