जाने माने अंकशास्त्री और आकाश इंस्टीट्यूट के चेयरमैन जेसी चौधरी
- फोटो : Amar Ujala
महामारी का असर अभी कुछ दिन और जारी रहेगा, देश के लिए जून से सितंबर के समय ज्यादा चिंताजनक है, वहीं विश्व के कई देश इस वर्षभर महामारी से संघर्षरत रह सकते हैं। यह आकलन प्रख्यात अंकशास्त्री, प्रेरक व्याख्यानदाता और आकाश इंस्टीट्यूट के चेयरमैन जेसी चौधरी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत के दौरान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, अभी वायरस नुकसान करता रहेगा, सतर्क रहेंगे तो बचे रहेंगे। साथ ही उन्होंने महामारी की वजह से मानव जीवन मे आने वाले कई बदलावों के भी एक खाका खींचा पढ़िए इस बातचीत के विशेष हिस्से:
प्रश्न: अंकशास्त्र क्या है, इसका, उपयोग कैसे किया जाता है?
- अंकशास्त्र प्राचीन विद्या है। यह भारत में करीब 4000 वर्ष से मौजूद है। चीन में भी यह 3500 वर्षों से उपयोग की जाती रही है। यह नवग्रहों पर आधारित है। सभी ग्रहों का अपना वाइब्रेशन होता है, हमारी कोशिकाओं पर उनका असर होता है। अगर ग्रहों का वाइब्रेशन और शरीर की कोशिकाओं पर हुए असर में सामंजस्य स्थापित होता है तो यह सकारात्मक परिणाम देता है। अंकशास्त्र में हर अक्षर के लिए अंक निर्धारित हैं। अक्षरों से बने व्यक्ति या किसी विषय को एक अंक में बदल कर, किसी अन्य व्यक्ति या विषय पर उसके असर की गणना की जाती है।
इस प्रकार दिए गए हैं अक्षरों को अंक
1- A, I, J, Q, Y
2- B, K, R
3- C, G, L, S
4- D, M, T
5- E, H, N, X
6- U, V W
7- O, Z
8- F, P
गणना: हर नाम के अक्षरों को अंकों में बदला जाता है। फिर इन अंकों को आपस में तब तक जोड़ते हैं, जब तक कि एक अकेला अंक न बच जाए। यही अंक उस नाम का अंक होता है।
प्रश्न: किस पर क्या असर होगा?
- ऐसे देश जिनके अंक 3, 6, 7, 8 और 9 हैं, उन पर यह ज्यादा घातक साबित होगी। वहीं 1, 2, 4 और 5 अंक वाले देशों पर उसका असर कम रहेगा।
प्रश्न: भारत को लेकर आशंकाएं हैं?
- भारत का अंक 3 है। यहां असर मध्यम स्तर का रहेगा। हमारे यहां, यह वायरस जून से लेकर सितंबर तक अपना असर दिखाता रहेगा। अक्तूबर से यह असर घटना शुरू होगा। वर्ष 2021 भारत के अंक के अनुकूल है, पहली तिमाही में भारत इस महामारी पर नियंत्रण कर लेगा।
प्रश्न: विश्व के हालात कब तक सुधारेंगे?
- अक्टूबर से नवंबर के समय में वायरस की वैक्सीन तैयार की जा सकती है, जिसके बाद धीरे धीरे पूरी दुनिया के हालात में सुधार आना शुरू होंगे। लेकिन यह एक साथ नहीं होगा, बल्कि क्षेत्र के अनुसार होगा।
प्रश्न: महामारी को लेकर आपने फरवरी में एक वीडियो यूट्यूब पर जारी किया था, अब दो महीने बीत चुके हैं, उसका अधिकतर आकलन सही रहा है, लेकिन उसी वीडियो में अमेरिका को लेकर हुआ आकलन अपवाद है। ऐसे में इस विधा की सटीकता पर क्या कहना चाहेंगे?
- मैंने फरवरी में जो वीडियो बनाया था उसमें अमेरिका की यूएसए यानी यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका के नाम से गणना की थी। लेकिन अंक शास्त्र में घटनाएं गणनाएं लोकप्रिय नामों के आधार पर होती हैं, ना की आधिकारिक नाम के आधार पर। यही वजह है कि जब मैंने अमेरिका के नाम से फिर से गणना की तो सामने आया कि कोरोना वायरस यहां भयानक कहर मचाएगा, और यह आने वाले कुछ समय जारी रहेगा।
प्रश्न: इन अनिश्चितता भरी परिस्थितियों में लोगों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
- लोगों को मैं यह सलाह देना चाहूंगा कि वे नई दुनिया और इसमें आ रहे बदलाव के अनुसार अपने जीवन को ढालने की तैयारी शुरू कर दें। यह बदलाव कई महीनों से लेकर अस्थायी रहने वाले हैं। यह हमारे जीवन को बेहतर करने वाले साबित होंगे।
प्रश्न: आप किन क्षेत्रों में और किस प्रकार के बदलावों की अपेक्षा कर रहे हैं?
- शिक्षा: आजकल हम सुबह उठते हैं तो अपने पोतों को, चाहे वे यूकेजी में हों या ऊपर की क्लास में, अपनी स्कूल की शिक्षिका के साथ वीडियो कॉल पर पढ़ता हुआ पाते हैं। यह बदलाव की शुरुआत है। मुझे लगता है कि शिक्षा क्षेत्र में इस महामारी के चलते सबसे ज्यादा बदलाव आने जा रहे हैं। अभी स्कूल या कोचिंग में 50-50 छात्रों को साथ बैठाकर पढ़ाने का चलन खत्म हो जाएगा। स्कूलों को भी नए समय के अनुसार चलना होगा। मुझे लगता है लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी अभिभावकों में अपने बच्चों को कोचिंग या स्कूल भेजने में झिझक बनी रहेगी। उनकी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को शिक्षण संस्थानों को बदलाव लाने होंगे। बहुत संभव है कि सप्ताह में 3 दिन स्कूली कक्षा और 3 दिन घर पर पढ़ाई करवाई जाए। स्कूल की कक्षा में इसलिए क्योंकि कई विषयों को प्रायोगिक रूप से पढ़ाना जरूरी होता है।
- पर्यटन: मेरे अनुभव के अनुसार यह क्षेत्र और इसमें अगर यात्रा, मनोरंजन और मॉल संस्कृति आदि क्षेत्रों को भी मिला लें तो महामारी का यहां व्यापक असर होने जा रहा है। यह क्षेत्र समय के अनुसार किस प्रकार खुद को ढालेंगे यह देखना रोचक होगा।
- स्वास्थ्य: अच्छी सेहत के लिए लोगों में सजगता बढ़ेगी। खासतौर से अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए लोग ज्यादा ध्यान देंगे। खाने-पीने और व्यायाम को लेकर के जागरूकता आएगी। कोरोना वायरस से बचाव में हमारी इम्यूनिटी का बड़ा रोल है।अमेरिका, फ्रांस और इटली जैसे देशों में वायरस ने जैसी मौत की तबाही मचाई है, उसके मुकाबले हम बचे हुए हैं तो इसकी वजह हम भारतीयों का मजबूत रोग प्रतिरोधक रक्षा तंत्र है। निकट भविष्य में आयुर्वेद और भारत की अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर लोगों का विश्वास बढ़ेगा। खासतौर से वनस्पति आधारित भोजन पर लोग ज्यादा निर्भर रहना चाहेंगे।
- मानव संवेदना: सबसे पहले महामारी के हालात में नागरिकों को अपने डर को नियंत्रित करना सीखना होगा। हालांकि लॉक डाउन के बाद यह डर ज्यादा खुलकर सामने आएगा अपने कार्यस्थल या अन्य जगहों पर हमारे आसपास मौजूद लोगों में कौन संक्रमित है या कौन हमें संक्रमित कर सकता है? इस प्रकार की ख्याल मन को विचलित करते रहेंगे। हमें इन खयालों के साथ जीना सीखना होगा। मैं उम्मीद कर रहा हूं कि कोरोना वायरस का टीका बनने के बाद डर पर नियंत्रण करना आसान होगा, लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता है हमें अपनी कोशिश तो करनी ही होगी, ताकि जीवन पटरी पर लौट सके। सकारात्मक सोच रखेंगे तो हम मजबूत बनेंगे, अगर डरते रहेंगे तो यह कोरोना वायरस को खुद बुलाने जैसा होगा। अपने अवचेतन मन में हम यह सोचें कि वायरस हमें संक्रमित नहीं करेगा, सावधानी बरतें ही, किसी तरह के लक्षण मिलने पर अपनी जांच भी अवश्य करवाएं।