आपातकाल को लेकर संसद में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर दावा किया है कि तत्कालीन आरएसएस प्रमुख माधुकर दत्तात्रेय देवरस ने इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर संघ पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग की थी। उन्होंने इन पत्रों की प्रमाणित प्रतियां भी भेजी हैं। आखिर इन पत्रों में क्या लिखा है और विवाद क्यों बढ़ा?
आपातकाल के दौर को लेकर संसद में छिड़ी बहस के बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन को पत्र लिखकर अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज भेजे हैं। रमेश ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा में कहा था कि तत्कालीन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख माधुकर दत्तात्रेय देवरस ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर संघ पर लगा प्रतिबंध हटाने का अनुरोध किया था। इस दावे पर भाजपा सांसदों ने उनसे प्रमाण मांगा था। इसके बाद उन्होंने संबंधित पत्रों की प्रमाणित प्रतियां सभापति को भेजी हैं।
जयराम रमेश ने सभापति को क्या लिखा?
राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने अपने पत्र में कहा कि उन्होंने एक दिन पहले संसदीय कार्य मंत्री के बयान का जवाब दिया था। उस दौरान भाजपा सांसदों ने उनके इस दावे को प्रमाणित करने की मांग की कि आरएसएस प्रमुख ने आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी को पत्र लिखा था। रमेश ने कहा कि अब वह रिकॉर्ड के लिए अपने दावे का प्रमाणीकरण भेज रहे हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी को लिखे गए दो पत्र और आचार्य विनोबा भावे को लिखा गया एक पत्र सभापति को भेजा है।
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इन पत्रों में क्या होने का दावा किया गया?
जयराम रमेश ने अपने पत्र में ब्रह्म दत्त की पुस्तक फाइव हेडेड मॉन्स्टर: ए फैक्चुअल नैरेटिव ऑफ द जेनेसिस ऑफ जनता पार्टी का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, इस पुस्तक में 1975 में पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल से माधुकर दत्तात्रेय देवरस द्वारा इंदिरा गांधी को लिखे गए दो पत्रों का जिक्र है। पुस्तक के मुताबिक, इन पत्रों में देवरस ने इंदिरा गांधी से आरएसएस पर लगा प्रतिबंध हटाने का अनुरोध किया था। साथ ही उन्होंने संघ के बारे में बनी गलत धारणाओं को दूर करने की बात कही थी और दावा किया था कि संघ पूरे देश में विकास कार्यों में लगा हुआ है।
पत्रों में बिहार और गुजरात आंदोलनों का कैसे जिक्र हुआ?
पुस्तक के अनुसार, देवरस ने अपने पत्रों में कहा था कि आरएसएस का बिहार और गुजरात में चले आंदोलनों, जिनमें जयप्रकाश नारायण का आंदोलन भी शामिल है, उनसे कोई संबंध नहीं है। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि आचार्य विनोबा भावे को लिखे गए एक अन्य पत्र में देवरस ने उनसे अनुरोध किया था कि वे प्रधानमंत्री के मन में संघ को लेकर बनी गलत धारणा दूर करें। उन्होंने यह भी आग्रह किया था कि संघ के स्वयंसेवकों को जेल से रिहा कराया जाए ताकि वे देश की विकास योजनाओं में भाग ले सकें। यह पत्र मुंबई के सेंट जोसिस अस्पताल के जेल वार्ड से लिखा गया बताया गया है।
इंदिरा गांधी को लिखे पत्र में और क्या दावा किया?
जयराम रमेश ने दावा किया कि इंदिरा गांधी को लिखे गए एक पत्र में माधुकर दत्तात्रेय देवरस ने उस समय उन्हें बधाई भी दी थी, जब सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों ने उनके चुनाव की वैधता को सही ठहराया था। कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने यह पूरा रिकॉर्ड राज्यसभा सभापति को भेज दिया है, ताकि सदन में दिए गए उनके बयान का प्रमाणीकरण दर्ज किया जा सके। उन्होंने अपने पत्र में इन दस्तावेजों को रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने का अनुरोध भी किया है।