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Elgar Parishad case: ज्योति जगताप को जमानत से इनकार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने एनआईए के केस को माना सही

Mon, 17 Oct 2022 12:22 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

एनआईए ने आरोप लगाया है कि जगताप प्रतिबंधित संगठन भाकपा (Maoist) की गतिविधियों का देश के शहरी क्षेत्रों में विस्तार करने में जुटी थी। एलगार परिषद का आयोजन 31 दिसंबर 2017 को पुणे में हुआ था। इसका मकसद सरकार का विरोध करना और उसके खिलाफ नफरत फैलाना था। 

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ज्योति जगताप - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज एक्टिविस्ट ज्योति जगताप को जमानत देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि एलगार परिषद-माओवादी लिंक मामले में एनआईए द्वारा उसके खिलाफ दायर केस प्रथम दृष्ट्या सही प्रतीत होता है। 

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एनआईए ने आरोप लगाया है कि जगताप प्रतिबंधित संगठन भाकपा (Maoist) की गतिविधियों का देश के शहरी क्षेत्रों में विस्तार करने में जुटी थी। एलगार परिषद का आयोजन 31 दिसंबर 2017 को पुणे में हुआ था। इसका मकसद सरकार का विरोध करना और उसके खिलाफ नफरत फैलाना था। जगताप पर परिषद के सम्मेलन के लिए दलितों को उकसाने व उन्हें एकत्रित करने का भी आरोप है। 

बॉम्बे हाईकोर्ट की डबल बेंच के जस्टिस एएस गडकरी और एमएन जाधव ने 34 वर्षीय ज्योति जगताप की अपील खारिज कर दी। जगताप ने फरवरी 2022 में एनआईए की विशेष कोर्ट द्वारा उसे जमानत देने से इनकार करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा, 'हमारी राय में एनआईए का केस प्रथम दृष्ट्या सही लगता है। इसलिए यह अपील खारिज की जाती है।'
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सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया था
ज्योति जगताप को एलगार परिषद के पुणे सम्मेलन में भड़काऊ नारे लगाने और गाने के आरोप में सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। वह तब से मुंबई की भायखला महिला जेल में बंद है। एनआईए के जांचकर्ताओं के अनुसार 31 दिसंबर, 2017 को एलगार परिषद के सम्मेलन में भड़काऊ भाषण दिए गए थे।

इसके बाद 1 जनवरी, 2018 को महाराष्ट्र के पुणे जिले के कोरेगांव-भीमा में हिंसा हुई थी। पुणे पुलिस ने आरंभिक जांच में दावा किया था कि इस सम्मेलन को नक्सलियों का समर्थन था। मामले की जांच बाद में एनआईए ने अपने हाथ में ले ली थी। एनआईए के मुताबिक कबीर कला मंच प्रतिबंधित आतंकी संगठन भाकपा (माओवादी) का अग्रणी समूह है। 

जगताप ने बताया खुद को निर्दोष
गायिका और एक्टिविस्ट जगताप ने दावा किया कि वह निर्दोष है। एनआईए उसके खिलाफ कोई भी सबूत पेश करने में विफल रही है। वहीं, 
केंद्रीय जांच एजेंसी एनआई ने दावा किया है कि आरोपी भाकपा (माओवादी) की सक्रिय सदस्य थी  और वह शहरी क्षेत्रों में प्रतिबंधित आतंकवादी समूह की गतिविधियों को फैला रही थी। उसने हथियारों और विस्फोटकों के उपयोग के लिए प्रशिक्षण लिया था। जगताप ने दलील दी थी कि कबीर कला मंच एक सांस्कृतिक समूह था, जिसने संगीत और कविता के माध्यम से सांप्रदायिक सद्भाव और धर्मनिरपेक्षता के प्रसार का प्रयास किया था। 

16 आरोपियों में से एक की मौत, दो जमानत पर
एलगार परिषद मामले में गिरफ्तार किए गए 16 लोगों में से फादर स्टेन स्वामी की पिछले साल मुंबई के एक निजी अस्पताल में न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी। दो अन्य आरोपी सुधा भारद्वाज और वरवर राव को जमानत मिल चुकी है, अन्य सभी आरोपी जेल में बंद हैं। 

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