आवासीय सोसाइटियों में सामान्य क्षेत्रों और बैक-अप जनरेटर के लिए अलग-अलग बिलिंग सुनिश्चित की गई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। उपभोक्ता अब अपने ई-वाहन चार्ज करने के लिए अलग बिजली कनेक्शन ले सकेंगे।
केंद्र सरकार की ओर से विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम में संशोधन के बाद अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि पांच किलोवाट क्षमता तक की सौर पीवी प्रणालियों के लिए आवश्यक वितरण प्रणाली को मजबूत करने का काम वितरण कंपनियां अपनी लागत पर करेंगी। साथ ही, वितरण लाइसेंसधारी के लिए रूफटॉप सोलर पीवी सिस्टम चालू करने की समयसीमा 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी गई है।
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नियमों के तहत अब बहुमंजिला फ्लैटों में रहने वाले उपभोक्ताओं को कनेक्शन का प्रकार चुनने का अधिकार दिया जाएगा। सहकारी समूह हाउसिंग सोसाइटियों, बहुमंजिला इमारतों, आवासीय कॉलोनियों में रहने वाले मालिकों के पास अब वितरण लाइसेंसधारी से या तो सभी के लिए व्यक्तिगत कनेक्शन या पूरे परिसर के लिए एकल-बिंदु कनेक्शन चुनने का विकल्प होगा।
आवासीय सोसाइटियों में सामान्य क्षेत्रों और बैक-अप जनरेटर के लिए अलग-अलग बिलिंग सुनिश्चित की गई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। उपभोक्ता अब अपने ई-वाहन चार्ज करने के लिए अलग बिजली कनेक्शन ले सकेंगे। यह देश के कार्बन उत्सर्जन को कम करने और 2070 तक नेट जीरो तक पहुंचने के लक्ष्य के अनुरूप है।
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सब मीटर और सीधे कनेक्शन वालों के बिल में समानता लाने की भी कवायद
नए नियमों में सामान्य एकल-बिंदु कनेक्शन के जरिये सब मीटर से बिजली आपूर्ति पाने वाले उपभोक्ताओं और व्यक्तिगत कनेक्शन का लाभ उठाने वाले उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले टैरिफ में भी समानता लाई गई है। वितरण लाइसेंसधारी से प्राप्त व्यक्तिगत बिजली खपत के लिए मीटरिंग, बिलिंग और वसूली अलग से की जाएगी। इसमें आवासीय संघ से बिजली बैकअप की व्यक्तिगत खपत और ऐसे आवासीय संघों के सामान्य क्षेत्रों के लिए बिजली की खपत शामिल होगी।