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मोदी के भाषण से सुर्खियों में आए नगला फतेला के विद्युतीकरण में भी खामियां

Mon, 22 Aug 2016 03:27 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, हाथरस
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बिजली - फोटो : amar ujala
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बाद सुर्खियों में आए सासनी के गांव नगला फतेला में विद्युतीकरण के तहत एक साल पहले बनी लाइन में बेशक करंट दौड़ गया हो, लेकिन गांव में बिजली अफसरों की भागदौड़ कम नहीं हो रही। अब तक की पड़ताल में यह बात भी साबित हो गई है कि गांव के विद्युतीकरण में कार्यदायी एजेंसी ने मानक की अनदेखी की है। रविवार को बिजली अफसरों ने गांव की लाइन का नए सिरे से सर्वे किया। सर्वे में गांव के विद्युतीकरण में तमाम खामियां सामने आईं। अधिकारियों ने एजेंसी को खामियां दूर करने के निर्देश दिए हैं।
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अफसरों की मानें तो एजेंसी ने अभी इस गांव की लाइन को विभाग को हैंडओवर नहीं किया है। लिहाजा इन खामियों के लिए पूरी जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की ही बनती है। नगला फतेला के प्रस्तावित विद्युतीकरण में गांव में 135 पोल लगाए जाने थे। मौके पर 98 पोल ही लगाए गए हैं। नए सिरे से किए गए सर्वे के अनुसार करीब 16 पोल और लगाए जाएंगे।

बंच केबल से घरेलू उपभेक्ताओं के कनेक्शन के लिए खंभों पर केबल बॉक्स नहीं लगाए गए हैं, जिससे कनेक्शन देने में परेशानी एवं विलंब हो रहा है। हैंडओवर नहीं होने से विभाग द्वारा अभी तक निर्माण इकाई को एनओसी तक नहीं दी गई है। विद्युतीकरण में मिली खामियों को दूर करने के लिए निर्माण इकाई गांव में सामान पहुंचा रही है। रविवार को भी दोपहर बाद ग्रामीणों को घरेलू कनेक्शन दिए गए। 
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2002 में ही विद्युतीकृत हुआ था नगला जहरू

प्रतीकात्मक चित्र
सासनी। ग्राम पंचायत नगला फतेला के माजरा नगला जहरू में रविवार को बिजली अफसरों ने नए कनेक्शन देने के लिए कैंप लगाया। पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में तो इस गांव में कोई काम नहीं हुआ है, लेकिन तत्कालीन बसपा शासनकाल में वर्ष 2002 में इस गांव का विद्युतीकरण डॉ.अंबेडकर ग्राम्य विकास योजना से हुआ था। राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत गांव को ऊर्जीकृत किया गया था।

गांव में एचटी की सप्लाई है। खंभों पर ट्रांसफॉर्मर भी लगे हैं। करीब 22 ग्रामीणों के कनेक्शन भी हैं। वर्तमान में बिजली विभाग मात्र ग्रामीणों को कनेक्शन देने के लिए प्रयास कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में एचटी लाइन को समाप्त कर बंच केबल डलवा दी जाए तो दुर्घटनाओं का खतरा कम हो जाएगा। घरेलू उपकरणों का नुकसान भी कम होगा।
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