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Electricity: जनवरी में 210 गीगावाट पहुंची अधिकतम मांग, 2022 के 211 गीगावाट के बेहद करीब रही

Sun, 26 Feb 2023 04:51 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार 20 फरवरी को उच्च मांग 205.52 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। सबसे अहम, 10 जून 2022 को 211 गीगावाट बिजली की मांग का रिकॉर्ड बना था। इस बार जनवरी में ही उच्च मांग इसके बेहद करीब दर्ज हो चुकी है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इस बार फरवरी के महीने में ही कार्यालयों में पंखे-एसी चलने लगे हैं। वजह, तेजी से बढ़ती गर्मी और परिणाम, बिजली की बढ़ती मांग। आने वाले महीनों में बिजली की सर्वाधिक खपत के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं। जनवरी 2023 में ही मांग 210.61 गीगावाट दर्ज हो चुकी है, यह जनवरी 2022 के 192.18 गीगावाट से करीब 13 प्रतिशत अधिक है। जनवरी 2021 में सर्वाधिक मांग 189.39  गीगावाट थी। 

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केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार 20 फरवरी को उच्च मांग 205.52 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। सबसे अहम, 10 जून 2022 को 211 गीगावाट बिजली की मांग का रिकॉर्ड बना था। इस बार जनवरी में ही उच्च मांग इसके बेहद करीब दर्ज हो चुकी है। अब तक बिजली की बढ़ती मांग को देश में आर्थिक व उत्पादन गतिविधियों में मजबूत सुधार से जोड़ा जा रहा था। 

इस बार जनवरी में 12,616 करोड़ यूनिट बिजली की खपत हुई, जबकि जनवरी 2022 में यह 11,180 करोड़ यूनिट और जनवरी 2021 में खपत 10,976 करोड़ यूनिट थी। दिसंबर 2022 में भी अधिकतम मांग दिसंबर 2021 के मुकाबले 12 प्रतिशत अधिक थी। 
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मौसम विभाग के अनुसार मार्च 2022 भारत के लिए 122 वर्षों में सर्वाधिक गर्म साबित हुआ था। इस वर्ष फरवरी का औसत तापमान भी ऐसे रिकॉर्ड बना सकता है। इस समय भी औसत तापमान सामान्य से 11-12 डिग्री सेल्सियस तक अधिक है। यह जल्द आ रही भीषण गर्मी का संकेत है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को जरूरत के अनुसार सिंचाई बढ़ाने को कहा है।

इतनी बढ़ सकती है मांग  
दिसंबर में केंद्रीय ऊर्जा सचिव आलोक कुमार ने अनुमान जताया था कि अप्रैल 2023 में बिजली की अधिकतम मांग 230 गीगावाट तक जा सकती है। इसे देखते हुए बिजली उत्पादन क्षमता सुनिश्चित रखने की बात कही गई। राजस्थान में बिजली मंत्री भंवर सिंह भाटी ने हाल में बयान दिया कि अप्रैल में बिजली की मांग 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। फरवरी में हुई तापमान वृद्धि असामान्य है, मार्च से जून के चार महीनों को मौसम विभाग गर्मी के चरम प्रभाव का समय मानता है।  

चीन से ज्यादा खपत कर बनाया था रिकॉर्ड
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, 2022 में मार्च से जुलाई तक रही तेज गर्मी और सुधरती आर्थिक व उत्पादन गतिविधियों से भारत में बिजली की सालाना मांग 8.4% की दर से बढ़ी। सामान्यत: यह 5.4 फीसदी की दर से बढ़ती है। दूसरी ओर चीन में महज 2.4% की वृद्धि हुई। आईईए के अनुसार, 2023 से 2025 तक भारत में वृद्धि दर 5.6% रह सकती है लेकिन अब मांग का मौजूदा पैटर्न वास्तविक वृद्धि इससे कहीं अधिक रहने का संकेत दे रहा है।

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