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पेट्रोल-डीजल नहीं इलेक्ट्रिक वाहन हैं भविष्य

Wed, 29 Nov 2017 09:38 AM IST
नंद राम
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इलेक्ट्रिक वाहन
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भारत सरकार जलवायु परिवर्तन एवं प्रदूषण को नियंत्रित करने और कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए 2030 तक सड़कों पर सभी वाहनों को इलेक्ट्रिक करना चाहती है। अभी हाल ही में इसी के मद्देनजर सरकारी संस्था एनर्जी एफिसिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) द्वारा टाटा मोटर्स को 1,120 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया गया। 
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इसके तहत टाटा मोटर्स को 10,000 इलेक्ट्रिक वाहन सप्लाई करने होंगे। इन वाहनों का इस्तेमाल सरकार और उससे जुड़ी एजेंसियों द्वारा इस्तेमाल होने वाली पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के स्थान पर किया जाएगा। जाहिर है इसके बाद देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में इजाफा होगा। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजूकी ने डेन्शो कॉर्प और तोशिबा कॉर्प के साथ इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों की लीथियम-इयोन बैटरी के लिए एक नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए 1200 करोड़ रुपये का निवेश किया है। 

पढ़ें- इलेक्ट्रिक कारों की ऊर्जा का दोबारा किया जा सकता है इस्तेमाल

बजाज ऑटो भी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के मद्देनजर अपनी एक नई इकाई शुरू करने की योजना बना रहा है। यह नई इकाई दोपहिया और तिपहिया वाहन बनाएगी। हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड की भी इलेक्ट्रिक कारों को लाने की योजना है। जेएसडब्ल्यू समूह की शाखा जेएसडब्ल्यू एनर्जी की भी 2020 तक इलेक्ट्रिक व्हीकल को लॉन्च करने की योजना है। कंपनी ने अगले तीन वर्षों में 4 हजार करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बनाई है।
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दुपहिया वाहनों का बड़ा बाजार

टू व्हीलर वाहन
भारत दुपहिया वाहनों का बड़ा बाजार है। इलेक्ट्रिक वाहनों में भी यह देखने को मिलता है। आंकड़ों के अनुसार, देश में बिकने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों में 92 प्रतिशत हिस्सा स्कूटर जैसे दुपहिया वाहनों का है। इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों को उम्मीद है कि दुपहिया वाहनों की यह बिक्री आगे भी बनी रहेगी। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकारों ने सार्वजनिक व सरकारी परिवहन क्षेत्र में बिजली से चलने वाले बड़े वाहनों की संख्या बढ़ाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। वित्त वर्ष 2016-17 में देश में लगभग लगभग 39 हजार इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई। 

सोसायटी ऑफ मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल (एसएमईवी) के अनुसार उन वाहनों में से लगभग 92 प्रतिशत दुपहिया और केवल आठ प्रतिशत ही चौपहिया वाहन थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में दुपहिया वाहनों का बड़ा हिस्सा आने वाले दिनों में भी बना रहेगा। उल्लेखनीय है कि भारत को दुपहिया वाहनों का देश कहा जाता है। देश में हर महीने औसतन 17 लाख से अधिक दुपहिया वाहनों की बिक्री होती है। बीते अक्तूबर माह में साढ़े 17 लाख दुपहिया वाहनों की बिक्री हुई थी। इनमें मोटरसाइकिल, स्कूटर और मोपेड शामिल हैं। एसएमईवी के निदेशक सोहिंदर गिल कहते हैं, ‘भारत दुपहिया वाहनों का देश है। इसलिए आने वाले दिनों में जो इलेक्ट्रिक दुपहिया वाहन आएंगे, उनको फायदा मिलेगा। इलेक्ट्रिक वाहनों की कम लागत व उनका आसान रख-रखाव भी आसान है।’

निजी कंपनियों की पहल

देश की दिग्गज ऑटो कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) ने ऐप आधारित कैब सुविधा मुहैया कराने वाली कंपनी उबर के साथ मिलकर इस सिलसिले में काम करने की योजना बनाई है। इसके शुरुआती चरण में नई दिल्ली और हैदराबाद में पायलट रन आयोजित किया जाएगा। इसमें e2o प्लस हैच और eVerito महिंद्रा की सेडान कारों को उबर के प्लैटफॉर्म पर चलाया जाएगा। दोनों कंपनियों के करार के तहत, इलेक्ट्रिक वाहनों की सप्लाई के अलावा वाहन बीमा, रखरखाव और फाइनेंस आदि भी शामिल हैं।

दोनों कंपनियां उन सार्वजनिक और निजी कंपनियों के साथ मिलकर काम करेंगी, जो भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 'कॉमन यूज चार्जिंग ईकोसिस्टम' पर काम कर रही हैं या काम करने की योजना बना रही हैं। उधर, जाएम ऑटोमोटिव्स और देश की सबसे बड़ी कैब सर्विस कंपनी ओला ने नैनो आधारित इलेक्ट्रिक कारों की सप्लाई के लिए एक समझौता किया है। जाएम शुरुआती चरण में 400 नियो कारें सप्लाइ करने की तैयारी कर रही है। उबर और ओला कैब कंपनियों की कोशिश से सरकार के उस कदम को काफी मदद मिलेगी, जिसके तहत भारत सरकार 2030 तक सभी वाहनों को इलेक्ट्रिक करने की संभावना तलाश रही है। 
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इलेक्ट्रिक व्हीकल में गुजरात सबसे आगे

इलेक्ट्रिक वाहन
केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी तो देती ही है, इसके अलावा राज्य सरकारों द्वारा अपने स्तर पर इसके लिए प्रयास भी किए जा रहे। इस मामले में गुजरात ने देश के बाकी राज्यों के लिए एक उदाहरण पेश किया है। पिछले वित्त वर्ष में गुजरात में लगभग 4,330 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई है। बिक्री के लिहाज से गुजरात देश में अन्य राज्यों के मुकाबले पहले स्थान पर रहा। इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माताओं का नवगठित संगठन इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माता परिषद (एसएमईवी) के एक अध्ययन के अनुसार 2016 -17 में महाराष्ट्र में 1926 इकाई, राजस्थान में 2,388 इकाई, उत्तर प्रदेश में 2,467 इकाई व पश्चिम बंगाल में 2,846 इकाई ई-वाहनों की बिक्री हुई। इसके अनुसार, उक्त इलेक्ट्रिक वाहनों में 92 प्रतिशत दुपहिया और केवल 8 प्रतिशत चौपहिया वाहन रहे।

यह अध्ययन उन सभी इलेक्ट्रिक दुपहिया व चौपहिया वाहनों पर केंद्रित है, जोकि 2016-17 के दौरान बिके व चल रहे हैं। एसएमईवी के अतिरिक्त निदेशक मनु शर्मा बताते हैं कि इसकी बड़ी वजह प्रदेश सरकार द्वारा विशेषकर युवाओं में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के प्रयास हैं। प्रदेश सरकार द्वारा छात्र- छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी आदि खरीदने पर विशेष मदद के तहत वित्तीय प्रोत्साहन राशि दे रही है। शोध फर्म अर्नेस्ट एंड यंग की हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में इलेक्ट्रिक दुपहिया व तिपहिया वाहनों के विकास की बडी संभावनाएं हैं और उम्मीद है कि लोग जल्द ही इन वाहनों को अपनाएंगे।

सरकार के 2030 तक सारी गाड़ियों को इलेकि्ट्रक करने की राह में कई रोड़े हैं। सबसे पहली समस्या, जो होगी वह है इंफ्रास्ट्रक्चर। सीएनजी की ही बात करें, तो इसकी शुरुआत के लगभग डेढ़ दशक बाद तक आज भी लोगों को घंटों लाइन में इतंजार करना पड़ता है। उसी तरह पिछले कुछ सालों से बिक रहें इलेकि्ट्रक वाहनों के लिए दिल्ली में चार से पांच चार्जिंग स्टेशन हैं। ऐसे में देखना होगा कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाती है। अगर हाइब्रिड कारों की जाएं, तो ये एक प्रैक्टिकल ऑप्शन हो सकती हैं। लेकिन इनके सामने भी मंहगी मेंटेनेंस का मुद्दा है। हालांकि बाजार में मौजूद हर ऑटोमोबाइल कंपनी  इस दिशा में काम कर रही हैं और कम कीमत एवं सस्ते मेंटेनेंस  वाली गाड़ियां बाजार में उतारने की तैयारी में हैं। 
-टुटू धवन, ऑटो एक्सपर्ट
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