चुनाव आयोग द्वारा इलेक्टॉरल बॉन्ड का डेटा नए सिरे से जारी होने के बाद नई जानकारियां सामने आ रही हैं। डेटा के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस को सबसे अधिक दान 540 करोड़ सैंटियागो मार्टिन की कंपनी फ्यूचर गेमिंग से मिला है। 540 करोड़ के साथ फ्यूचर गेमिंग टीएमसी का सबसे बड़ा दानकर्ता बन गया है। टीएमसी के अलावा, फ्यूचर गेमिंग ने डीएमके, वाईएसआर कांग्रेस, भाजपा और कांग्रेस को भी दान दिया है। फ्यूचर गेमिंग ने सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को भी 10 करोड़ का दान दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने के मामले में फ्यूचर गेमिंग देश का सबसे बड़े दानकर्ता बन के उभरा है। इसके अलावा, मेघा इंजीनियरिंग देश का दूसरा सबसे बड़ा दानकर्ता बना है, जिसने भाजपा, बीआरएस और डीएमके सहित विभिन्न दलों को 966 करोड़ रुपये दान दिए हैं। वहीं, चुनावी बांड के जरिये आम आदमी पार्टी को चंदा देने वालों में स्पाइसजेट और टेक महिंद्रा भी शामिल हैं।
रिलायंस से जुड़ी क्विक सप्लाई ने भाजपा को दिए 385 करोड़
नवी मुंबई स्थित धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (डीएकेसी) में पंजीकृत पते वाली और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़ी कंपनी क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड ने भाजपा को 395 करोड़ रुपये और शिव सेना को 25 रुपये दिए हैं। रिलायंस लिंक वाली एक अन्य कंपनी हनीवेल प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड ने भी 8 अप्रैल 2021 को 30 करोड़ रुपये के बांड खरीदे और सभी भाजपा को दे दिए। ताजा आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है।
क्विक सप्लाई कंपनी ने भाजपा और शिवसेना को छोड़ किसी अन्य राजनीतिक दल को कोई पैसा नहीं दिया। क्विक सप्लाई ने 2021-22 और 2023-24 के बीच 410 करोड़ रुपये के बांड खरीदे थे। इसमें 25 करोड़ रुपये को छोड़कर बाकी सभी भाजपा को दिए। 2022 में शिवसेना को उसने 25 करोड़ रुपये दिए थे।
नेक्सजी डिवाइसेज प्राइवेट लिमिटेड ने 35 करोड़ के चुनावी बांड खरीदे
एक अन्य कंपनी नेक्सजी डिवाइसेज प्राइवेट लिमिटेड ने मई 2019 और नवंबर 2022 में 35 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे। यह कंपनी सुरेंद्र लूनिया से जुड़ी है। लूनिया से जुड़ी एक अन्य कंपनी इन्फोटेल बिजनेस सॉल्यूशंस ने मई 2019 में 15 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे। लूनिया वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने रिलायंस से जुड़ी कंपनियों की एनडीटीवी में 29.18 प्रतिशत हिस्सेदारी अडानी समूह को बेच दी थी।
डेटा जारी होने पर चुनाव आयोग का बयान
चुनाव आयोग ने गुरुवार को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में एसबीआई ने 21 मार्च को इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा मुहैया कराया। आयोग ने पूरी जानकारी- जिस स्थिति में मिला वैसे ही आधार पर (as is where is basis) वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा 900 से अधिक पन्नों में आम जनता भी देख सकती है।
यहां देखें एसबीआई की तरफ से मुहैया कराया गया 938 पन्नों का पूरा डेटा-
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे निर्देश
दरअसल, भारतीय स्टेट बैंक ने 2018 में योजना की शुरुआत के बाद से 30 किस्तों में 16,518 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड जारी किए हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को 12 अप्रैल 2019 से खरीदे गए चुनावी बॉन्ड की जानकारी निर्वाचन आयोग को सौंपने का निर्देश दिया था। एसबीआई चुनावी बॉन्ड जारी करने के लिए अधिकृत वित्तीय संस्थान है।