निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की कुल 12 राज्यसभा सीटों पर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इसके तहत उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट पर द्विवार्षिक चुनाव होंगे, जबकि पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। इन सभी सीटों पर 16 अक्तूबर को मतदान होगा।
निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की कुल 12 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इन सभी सीटों पर 16 अक्तूबर को मतदान कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना भी होगी। आयोग के अनुसार, इसमें उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट पर होने वाले नियमित चुनाव शामिल हैं, जहां मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल की एक खाली सीट के लिए उपचुनाव भी कराया जाएगा। चुनाव के लिए अधिसूचना 29 सितंबर को जारी की जाएगी और उम्मीदवार 6 अक्तूबर तक अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।
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उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से कौन से सदस्य हो रहे हैं सेवानिवृत्त?
उत्तर प्रदेश से कार्यकाल पूरा करने वाले सांसदों में भाजपा के वरिष्ठ नेता हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बी. एल. वर्मा और सीमा द्विवेदी शामिल हैं। इसके अलावा समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के रामजी गौतम का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की सीट 11 सितंबर से ही खाली हो चुकी है। उन्हें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उनका इस्तीफा प्रभावी हुआ था। वहीं, उत्तराखंड से भाजपा सदस्य नरेश बंसल का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है।
12 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का एलान हुआ
- फोटो : अमर उजाला
यूपी में सियासी गणित और दलों की स्थिति
उत्तर प्रदेश में खाली हो रही 10 सीटों में से आठ सीटें भाजपा के पास थीं, जबकि सपा और बसपा के पास एक-एक सीट थी। अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव से पहले यह चुनाव काफी अहम माना जा रहा है। वर्तमान विधानसभा के संख्या बल के अनुसार, भाजपा गठबंधन आसानी से आठ सीटें जीत सकता है, जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में दो सीटें जाने का अनुमान है।
इस चुनावी नतीजे से बसपा का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व खत्म हो सकता है, क्योंकि उसके पास अपने दम पर रामजी गौतम की सीट बरकरार रखने के लिए जरूरी संख्या बल नहीं है। अगस्त में अपने एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद अब विधानसभा में बसपा का एक भी विधायक नहीं है।
साल 2020 में भी बसपा के पास अकेले राज्यसभा सदस्य चुनने की संख्या नहीं थी, लेकिन तब भाजपा ने 10 में से केवल आठ उम्मीदवार उतारे थे, जिससे बसपा के रामजी गौतम के लिए रास्ता बन गया था। उस समय सपा समर्थित निर्दलीय का नामांकन खारिज होने के बाद रामजी गौतम निर्विरोध निर्वाचित हुए थे, जिस पर सपा ने दोनों दलों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया था।
उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल का समीकरण
उत्तराखंड की इकलौती सीट पर भी भाजपा की जीत तय मानी जा रही है। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव की जरूरत 16 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद रुक्मिणी मल्लिक (अभिनेत्री कोयल मल्लिक) के इस्तीफे के बाद पड़ी है। इस सीट पर जीतने वाले सदस्य का कार्यकाल 2 अप्रैल 2032 तक रहेगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा में स्पष्ट बहुमत के साथ, वहां की सत्तारूढ़ भाजपा यह सीट तृणमूल कांग्रेस से छीनने की पूरी स्थिति में है।