चुनावी माहौल गर्म है, बयानबाजियों का दौर भी तेज हो चला है, नेता रैली जोर पकड़ चुकी है। जनता की अदालत में नेताओं की अग्निपरीक्षा का वक्त आ गया है। ऐसे चुनावी माहौल में नेताओं को हार का डर सता रहा है। चुनावी शायरी में पेश है एक नेता का दर्द जो भगवान से निवेदन कर रहा है कि सारे वोट उसे ही मिले।
एक नेता की चुनावी प्रार्थना...
भगवान निवेदन तुम से है कुछ वोट मुझे भी दे देना
बदले में मुझ से लड्डू, फल जो दिल भाए ले लेना
कृपा पात्र हम सब हैं तेरे कृपा दृष्टि मुझ पर रखना
मैं साथ आपका हरदम दूंगा मरते दम तक नाम जपूंगा
हर भाषण में मैं याद करूंगा नाम आपका अमर करूंगा
काम आपके मैं आऊंगा कृपा दृष्टि तुम भी रखना
बदले मुझ से लड्डू फल जो दिल भाए ले लेना
जो भूल गये नारायण को अब क्या उम्मीदें उनसे है
हर सुख सुविधाएं अपनी तो बस यार ख़ुदा के घर से है
पर एक दिन ऐसा आएगा हर काम जो उनका हमसे है
हम भी कह देंगे अब मत नहीं तुमको देना
बदले में दुआएं गिरने की चाहे तुम मुझसे ले लेना॥
-अनिल पाण्डेय, कवि