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Famous Faces: मैदान में उतरे बिना प्रतिभा सिंह ने कैसे जीता किला? जानें क्यों चर्चा में रहीं ये महिलाएं

Thu, 08 Dec 2022 04:50 PM IST
कुमार सम्भव जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रतिभा सिंह ने अकेले दम पर हिमाचल का किला कांग्रेस के नाम कर दिया तो डिंपल यादव ने सारे अनुमानों को धता बताते हुए मैनपुरी का आशीर्वाद हासिल किया। उधर, परिवार का विरोध झेलने के बावजूद रिवाबा ने जामनगर उत्तर में जीत हासिल की।
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चुनाव में छाईं ये तीन महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के उपचुनाव भी खासे चर्चा में रहे। तीनों राज्यों में सभी सीटों पर रुझान आ चुके हैं और कुछ जगह तो नतीजे भी घोषित हो गए हैं। इन सबके बीच तीन महिला चेहरे ऐसे रहे, जिन्होंने अपने दम पर न सिर्फ सियासी मोर्चा संभाला, बल्कि मैदान भी अपने नाम कर लिया। ये तीनों महिलाएं प्रतिभा सिंह, डिंपल यादव और रिवाबा जडेजा हैं। डिंपल और रिवाबा ने अपनी-अपनी सीटों पर जीत दर्ज की तो प्रतिभा सिंह ने मैदान में उतरे बिना ही पूरे खेल पलट दिया। आइए जानते हैं इन तीनों के बारे में...

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हिमाचल की क्वीन बनीं प्रतिभा सिंह

हिमाचल की राजनीति में प्रतिभा सिंह न सिर्फ जाना-पहचाना चेहरा हैं, बल्कि अब उन्हें सियासी मोहरों में माहिर भी माना जाने लगा है। वह सक्रिय राजनीति में भले ही 1998 में आई थीं, लेकिन उन्होंने अपनी सियासी चालों का लोहा अब मनवाया है। दरअसल, प्रतिभा सिंह को करीब छह महीने पहले ही हिमाचल प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई थी और उन्होंने सत्ता में कांग्रेस की वापसी करा दी। 

बता दें कि प्रतिभा सिंह वीरभद्र सिंह की पत्नी हैं। वीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे। बता दें कि प्रतिभा 1998 में सक्रिय राजनीति में उतरी थीं। उन्होंने मंडी संसदीय क्षेत्र से पहला चुनाव लड़ा, जिसमें उनके समधी और भाजपा नेता महेश्वर सिंह ने उन्हें करीब सवा लाख वोटों से हरा दिया था। हालांकि, 2004 में प्रतिभा सिंह ने इसका हिसाब चुकता कर लिया और महेश्वर सिंह को मात देकर संसद पहुंच गईं। 

2012 में हिमाचल का मुख्यमंत्री बनने के बाद वीरभद्र सिंह ने लोकसभा से इस्तीफा दिया तो उपचुनाव में प्रतिभा सिंह को ही जीत मिली थी। हालांकि, 2014 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 26 अप्रैल 2022 को कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें हिमाचल प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी, जिसके बाद प्रतिभा सिंह ने अपनी सियासी चालों से राज्य की सत्ता में कांग्रेस की वापसी करा दी।

मैनपुरी ने डिंपल को दिया आशीर्वाद

मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद खाली हुई मैनपुरी विधानसभा सीट पर उपचुनाव में उनकी बहू डिंपल यादव को जनता का आशीर्वाद मिल गया। डिंपल 2.86 लाख वोटों की बढ़त हासिल कर चुकी हैं और यहां से उनका हारना नामुमकिन है। 1998 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से बीकॉम करने वाली डिंपल ने 2009 में पहली बार राजनीति में कदम रखा था। वह कन्नौज लोकसभा सीट से दो बार सांसद भी रह चुकी हैं। यहां तक कि 2014 के दौरान मोदी लहर में भी उन्होंने अपना वर्चस्व कायम रखा था। डिंपल उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट कर्नल एसपी रावत की बेटी हैं। उन्होंने 24 नवंबर 1999 को अखिलेश के साथ लव मैरिज की थी। हालांकि, इस शादी के लिए दोनों को काफी पापड़ बेलने पड़े थे। दरअसल, जब अखिलेश और डिंपल पहली बार मिले थे, उस वक्त डिंपल महज 17 साल की थीं। वहीं, अखिलेश की उम्र सिर्फ 21 साल थी।
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जामनगर उत्तर में रिवाबा का जलवा

भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज खिलाड़ी रवींद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा ने जामनगर उत्तर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कर ली है। उन्होंने 50 हजार से ज्यादा वोट से जीत हासिल की। गौर करने वाली बात यह है कि रिवाबा को टिकट देने के लिए भाजपा ने अपने वर्तमान विधायक धर्मेंद्र जडेजा का टिकट काट दिया था। इसके अलावा चुनाव के दौरान रिवाबा का नाम इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि उन्हें अपने ही परिवार में विरोध का सामना करना पड़ा। पति रविंद्र जडेजा जरूर उनके साथ थे, लेकिन ननद नैना खुद इसी सीट से कांग्रेस का टिकट चाह रही थीं। ऐसे में ससुर और ननद दोनों रिवाबा के खिलाफ प्रचार कर रहे थे। रिवाबा करणी सेना की भी सदस्य रह चुकी हैं। करणी सेना ने साल 2018 में उन्हें महिला विंग का अध्यक्ष बनाया था।
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