लोकसभा चुनावों में भाजपा की जबरदस्त जीत महज उसके बहुमत हासिल करने तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि मतगणना के आंकड़ों में भी उसके उम्मीदवारों को मतदाताओं से मिला जबरदस्त समर्थन साफ दिखाई दिया। अपने साथी दलों के साथ मिलकर 330 से ज्यादा सीटें जीतने वाली भाजपा ने 13 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में कम से कम 50 फीसदी मत अपने खाते में हासिल किए, जबकि उसकी कट्टर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस को महज एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में ही 57 फीसदी मत पाने का मौका मिल पाया।
चुनाव आयोग के प्राथमिक आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा ने 2014 में मिले 31.34 फीसदी मतों में महत्वपूर्ण इजाफा करते हुए एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है। पहली बार 1984 में लोकसभा चुनाव में उतरी भाजपा को तब 7.74 फीसदी मत मिले थे, जो 1998 तक बढ़कर 25.59 फीसदी तक पहुंच गए थे। हालांकि इसके बाद 2009 तक भाजपा को अगले तीन चुनाव में अपने मत प्रतिशत (18.8 फीसदी) में गिरावट का सामना करना पड़ा था। लेकिन 2014 से सारी स्थिति ही बदल गई।
दूसरी तरफ कांग्रेस को पिछले आम चुनाव में मिले 19.5 फीसदी मतों में मामूली सा ही बदलाव देखा गया है। पहली बार 1951 के संसदीय चुनावों में उतरी कांग्रेस का मत प्रतिशत 1971 के चुनावों तक 40 के आसपास कायम रहा। 1977 के चुनाव में 32.14 फीसदी मत हासिल करने वाली कांग्रेस ने 1980 में फिर से 42.7 फीसदी और 1984-85 में 48.1 फीसदी मत पाकर नया रिकॉर्ड कायम किया था। हालांकि इसके बाद कांग्रेस का मत प्रतिशत लगातार गिरता रहा है।
2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यूपी और बंगाल में महज 6 फीसदी, जबकि बिहार में 7 फीसदी और आंध्र प्रदेश व सिक्किम में शर्मनाक प्रदर्शन करते हुए करीब 1-1 फीसदी वोट ही हासिल कर पाई। यहां तक कि पंजाब में भी अपने बेहतर प्रदर्शन के बावजूद कांग्रेस का वोट शेयर करीब 40 फीसदी ही रहा।