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क्या डॉ. लोहिया अंबेडकर की रिपब्लिकन पार्टी में सोशलिस्ट का विलय चाहते थे?

Fri, 03 May 2019 09:07 PM IST
अमर शर्मा अमर उजाला डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
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एक मंच पर मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव
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क्या समाजवादी चिंतक, विचारक, नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया अपनी सोशलिस्ट पार्टी का डॉ. भीमराव अंबेडकर की रिपब्लिकन पार्टी में विलय चाहते थे? बसपा के नेता सुधींद्र भदौरिया का कहना है कि 60 के दशक में डॉ. लोहिया की यही इच्छा थी। भदौरिया के अनुसार डॉ. लोहिया जो 60 के दशक में चाहते थे, वह 2019 में समाजवादी पार्टी, बसपा और राष्ट्रीय लोकदल के मिलन से पूरा हो रहा है। सुधींद्र भदौरिया के अनुसार इस अभियान में पिता और लोहिया के बेहद करीबी सहयोगी और जाने माने समाजवादी नेता अर्जुन सिंह भदौरिया भी शामिल थे। सुधींद्र भदौरिया 60 के दशक का एक फोटो भी साझा कर रहे हैं और उनका कहना है कि समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल और बसपा का मिलन ही असली समाजवाद है।
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सुधींद्र भदौरिया का कहना है कि सोशलिस्ट पार्टी का रिपब्लिकन पार्टी में विलय करने के लिए डॉ. लोहिया ने इसके बाबत मधु लिमये को पत्र भी लिखा था। उनके पास भी कुछ इस तरह के प्रमाण हैं। दरअसल लोहिया मानते थे कि रिपब्लिकन पार्टी के नेता अंबेडकर का कद काफी बड़ा है और उनकी विचारधारा अच्छी है।

सुधींद्र भदौरिया का कहना है कि लेकिन छह दिसंबर 1965 को डॉ. भीमराव अंबेडकर की मृत्यु हो जाने के बाद यह विलय नहीं हो पाया। इसी तरह से 12 अक्टूबर 1967 को डॉ. लोहिया की भी मृत्यु हो गई और यह सपना धरा का धरा रह गया।
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भदौरिया का कहना है कि हालांकि समाजवादी पार्टी और बसपा 90 के दशक में भी साथ आए थे, लेकिन सही तालमेल अब हुआ है। क्योंकि 90 के दशक में राष्ट्रीय लोकदल इसका हिस्सा नहीं था। भदौरिया का कहना है कि 60 के दशक में कांग्रेस को कई राज्यों में सत्ता से हाथ धोना पड़ा था।
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उत्तर प्रदेश में पहली संविद सरकार बनी थी और इसके मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह थे। चौधरी चरण सिंह की सोच, विचारधारा, चिंतन काफी अनुकूल थी। 
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