2021 के विधानसभा चुनाव कोरोनावायरस महामारी की दूसरी लहर के दौरान कराए गए थे। इसके चलते चुनाव आयोग ने सुरक्षित मतदान और कानून-व्यवस्था के लिए कई खास इंतजाम किए गए थे।
1. कोविड-19 प्रोटोकॉल और बचाव: मतदान केंद्रों पर स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया गया, जिनमें मास्क का इस्तेमाल, बूथों का सैनिटाइजेशन, प्रवेश से पहले थर्मल स्कैनर से शरीर के तापमान की जांच और सोशल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी) बनाए रखना शामिल था। उदाहरण के लिए असम के मतदान केंद्रों पर थर्मल स्क्रीनिंग करते हुए स्वयंसेवकों को तैनात किया गया था।
2. मतदान केंद्रों पर भीड़ कम करना: भीड़भाड़ से बचने और सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने प्रत्येक मतदान केंद्र (पोलिंग बूथ) पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या सीमा को 1500 से घटाकर 1000 कर दिया था।
3. पोस्टल वोटिंग और मतदान का अतिरिक्त समय: शारीरिक रूप से अक्षम (दिव्यांग) और 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग मतदाताओं की सुरक्षा और सहूलियत के लिए पोस्टल वोटिंग (डाक मतपत्र) की सुविधा प्रदान की गई थी। इसके अलावा भीड़ को प्रबंधित करने के लिए मतदान की समय सीमा भी एक घंटे बढ़ा दी गई थी।
4. चुनाव प्रचार और रैलियों पर सख्त प्रतिबंध: चुनाव के दौरान कोविड संक्रमण के मामले बढ़ने पर चुनाव आयोग ने कड़े कदम उठाए। शाम 7 बजे से सुबह 10 बजे तक सभी राजनीतिक रैलियों, जनसभाओं और नुक्कड़ सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया। बाद के चरणों में रोड शो पर पूरी तरह रोक लगा दी गई और जनसभाओं में भी अधिकतम 500 लोगों के ही शामिल होने की अनुमति दी गई। इसके अलावा, मतों की गिनती के दिन और उसके बाद किसी भी तरह के 'विजय जुलूस' को निकालने पर भी पाबंदी लगा दी गई थी।
5. अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था और वेबकास्टिंग: हिंसा की आशंका वाले क्षेत्रों (विशेषकर पश्चिम बंगाल) में स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की भारी तैनाती की गई। शुरुआत में कुछ दर्जन कंपनियों से शुरू हुई यह तैनाती चुनाव के अंतिम चरणों तक 1,000 कंपनियों तक पहुंच गई थी, जिनमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी, सीआईएसएफ और आईटीबीपी के जवान शामिल थे। निगरानी कड़ी करने के लिए हजारों संवेदनशील मतदान केंद्रों की वेबकास्टिंग भी की गई थी।