आयोग ने वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में योगदान रिपोर्ट प्रस्तुत न करने के लिए क्रमश: 1897, 2202 और 2351 आरयूपीपी की एक सूची भी आगे की कार्रवाई के लिए राजस्व विभाग से साझा की गई है।
चुनाव आयोग ने एक बार फिर गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) पर कार्रवाई की है। आयोग ने सोमवार को 111 आरयूपीपी का पंजीकरण रद्द करने का फैसला किया है। चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान के अनुसार इन 111 आरयूपीपी ने अपने पते में बदलाव की सूचना आयोग को नहीं दी थी। आयोग के अनुसार कई के पते पर भेजे गए संवाद वापस लौट आए हैं।
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हालांकि आयोग ने कहा है कि इससे प्रभावित कोई भी राजनीतिक दल संबंधित चुनाव अधिकारी और आयोग से 30 दिनों के अंदर संपर्क कर सकता है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने 25 मई को 87 आरयूपीपी को पंजीकरण से जुड़ी सूची से हटाया था।
आयोग ने वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में योगदान रिपोर्ट प्रस्तुत न करने के लिए क्रमश: 1897, 2202 और 2351 आरयूपीपी की एक सूची भी आगे की कार्रवाई के लिए राजस्व विभाग से साझा की गई है। अनिवार्य योगदान रिपोर्ट प्रस्तुत किए बिना आयकर छूट का दावा करने वाले 66 आरयूपीपी की सूची को भी राजस्व विभाग के साथ साझा किया गया है।
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सीआईसी ने चुनावी बॉन्ड छपाई की कुल लागत का ब्योरा मांगा
केंद्रीय सूचना आयोग ने इंडियन सिक्योरिटी प्रेस (आईएसपी) को चुनावी बॉन्ड की छपाई की कुल लागत का ब्योरा देने का निर्देश दिया है। एक आरटीआई के आवेदन पर आयोग ने यह जानकारी मांगी है। सूचना आयुक्त वनाजा एन सरना ने आईएसपी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि इस बारे में सूचना सार्वजनिक करने से देश के आर्थिक हितों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। जिसमें आरटीआई की धारा 8(1)(ए) के तहत छूट मिली हुई है।
आरटीआई कार्यकर्ता सेवानिवृत्त कोमोडोर लोकश बतरा ने आरटीआई दायर कर आईएसपी से चुनावी बॉन्ड की छपाई की कुल लागत की जानकारी मांगी थी। सरकार ने चुनावी चंदे में पारदर्शिता लाने के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड की शुरुआत की थी। वर्ष 2018 से अब तक विभिन्न चुनावों में 9187 करोड़ कीमत के 9208 बॉन्ड बचे जा चुके हैं।