विपक्ष द्वारा मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों को लेकर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने शनिवार को कहा कि ऐसा लगता है कि कुछ राजनीतिक दलों ने चुनाव मशीनरी को त्रुटियां बताने के लिए ‘‘उचित समय’’ पर मतदाता सूची की जांच नहीं की। चुनाव अयोग ने इन गड़बड़ियों के लिए राजनीतिक दलों को जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने यह भी कहा कि वह अपने अधिकारियों को खामियों को दूर करने में मदद करने के लिए दस्तावेज की जांच का स्वागत करता है।
बूथ स्तर एजेंट ने उचित समय पर मतदाता सूची की जांच नहीं की- आयोग
निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा कि मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद दावे और आपत्तियां उठाने का समय, पार्टियों के लिए खामियों को चिह्नित करने का उपयुक्त समय है।
बयान में कहा गया, ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ राजनीतिक दलों और उनके बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) ने उचित समय पर मतदाता सूचियों की जांच नहीं की और यदि कोई त्रुटि थी तो उसे इंगित नहीं किया।
निर्वाचन आयोग ने कहा कि हाल में कुछ राजनीतिक दलों और व्यक्तियों ने मतदाता सूचियों में त्रुटियों के बारे में मुद्दे उठाए थे, जिनमें पूर्व में तैयार की गई मतदाता सूचियां भी शामिल थीं। बयान में कहा गया है कि मतदाता सूची से संबंधित कोई भी मुद्दा उठाने का उपयुक्त समय ‘दावे और आपत्तियां’ अवधि के दौरान होता।आयोग ने कहा, यदि ये शिकायतें वास्तव में सही होतीं और इन मुद्दों को सही समय पर और सही माध्यमों से उठाया गया तो संबंधित एसडीएम, ईआरओ को चुनावों से पहले उन्हें सुधारने में सक्षम होते।
आयोग ने कहा, इन त्रुटियों की वजह राजनीतिक दलों के बूथ स्तरीय एजेंटों की तरफ से सूचियां बारीकी से न जांचना है। आयोग के दिशा-निर्देशों के आधार पर निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ)-जो एसडीएम स्तर के होते हैं-बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) की सहायता से ही सूची तैयार करते हैं और उन्हें अंतिम रूप देते हैं। ईआरओ और बीएलओ इसकी शुद्धता की जिम्मेदारी लेते हैं। मतदाता सूची तैयार करने के प्रत्येक चरण में राजनीतिक दलों की भागीदारी होती है। बिहार में भी यही देखने को मिला है।
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त्रुटियों का आयोग करेगा स्वागत
आयोग ने फिर दोहराया कि राजनीतिक दलों और किसी भी मतदाता की तरफ से सूची की जांच की जा सकती है। आयोग इसका स्वागत करता है। इससे एसडीएम, ईआरओ को त्रुटियों को दूर करने और मतदाता सूचियों को शुद्ध करने में मदद मिलेगी जो हमेशा से चुनाव आयोग का उद्देश्य रहा है। बिहार एसआईआर पर विपक्ष के बयानों का जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने कहा, बिहार के सभी राजनीतिक दलों को 20 जुलाई 2025 से उन लोगों लिस्ट दी गई है। जिनका नाम वोटर लिस्ट से बाहर किया जाना है।