वर्ष 2019 में यदि लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए गए, तो चुनाव आयोग को करीब 24 लाख इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की जरूरत पड़ेगी। यह संख्या अकेले संसदीय चुनाव में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम की दोगुनी है।
लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ कराए जाने को लेकर विधि आयोग के साथ बैठके के दौरान चुनाव अधिकारियों ने कहा कि 12 लाख अतिरिक्त ईवीएम खरीदने के लिए उन्हें करीब 4500 करोड़ रुपये चाहिए। इसके साथ ही 12 लाख वीवीपीएटी मशीन की भी जरूरत होगी।
बैठक में मौजूद सूत्रों ने बताया कि यह अनुमान मौजूदा ईवीएम की कीमत के आधार पर लगाया गया है। यदि साथ चुनाव होते हैं, तब संसदीय और विधानसभा चुनाव के लिए अलग-अलग कैबिन में ईवीएम और वीवीपीएटी के दो सेट मशीन रखने पड़ेंगे। दो सरकारी कंपनियां ईलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लि. और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि. ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनें बनाती हैं।
पूरे देश में करीब 10 लाख मतदान केंद्र हैं। यदि हर मतदान केंद्र पर ईवीएम और वीवीपीएटी मशीन रखनी पड़ी तो 10 लाख ईवीएम और इतनी ही संख्या में वीवीपीएटी की जरूरत होगी। इसके अतिरिक्त 20 फीसदी मशीनों को अलग से आरक्षित रखना होगा। चुनाव व्यवस्था का ब्योरा देते हुए बताया कि अभी प्रत्येक मतदान केंद्र पर पांच मतदान कर्मी तैनात किए जाते हैं। एक साथ चुनाव होने पर सात मतदान कर्मियों की जरूरत होगी।