चुनाव आयोग ने किया आरवीएम का प्रदर्शन।
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केंद्रीय चुनाव आयोग ने सोमवार को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को रिमोट वोटिंग मशीन (आरवीएम) का प्रदर्शन किया। आयोग ने इस मशीन के एक प्रोटोटाइप पर सभी दलों के नेताओं को डेमो दिखाया। बैठक में कांग्रेस, राजद, राकांपा समेत कई दलों के नेता शामिल हुए।
क्या है आरवीएम और कैसे काम करेगा?
आरवीएम का मतलब रिमोट वोटिंग मशीन है। 29 दिसंबर 2022 को चुनाव आयोग ने इसके बारे में मीडिया को बताया था। ये ऐसी मशीन है, जिसकी मदद से प्रवासी नागरिक बिना गृह राज्य आए अपना वोट डाल सकते हैं। आसान शब्दों में समझें तो अगर आप उत्तर प्रदेश के कानपुर में पैदा हुए और आपको किसी कारण केरल या देश के किसी दूसरे राज्य में रहना पड़ रहा है। ऐसे में वोटिंग के समय आमतौर पर आप अपने गृहराज्य नहीं जा पाते हैं। इसके चलते आप वोट भी नहीं डाल पाते। अब आरवीएम ऐसे लोगों को अपने मताधिकार के प्रयोग का मौका देगा।
आरवीएम की तैनाती पर विपक्षी दलों ने उठाया सवाल
विपक्षी दलों ने सोमवार को रिमोट वोटिंग मशीनों (आरवीएम) को तैनात करने की आवश्यकता पर सवाल उठाया और चुनाव आयोग से चुनाव प्रक्रिया के प्रति शहरी उदासीनता के मुद्दे का समाधान करने का आग्रह किया।
डेमो को देखने को तैयार नहीं कोई भी राजनीतिक दल: दिग्विजय सिंह
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राजनीतिक दलों की बैठक में भाग लेने के बाद पत्रकारों से कहा, कोई भी विपक्षी दल रिमोट वोटिंग मशीन के डेमो को नहीं देखना चाहता। पहले चुनाव आयोग को इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए कि ऐसी मशीन की जरूरत क्या। सिंह ने कहा कि उन्हें लगता है कि जब तक आम सहमति नहीं बन जाती तब तक कोई भी आरवीएम का डेमो नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल डेमो देखने को तैयार नहीं है। आरवीएम का विचार स्वीकार्य नहीं है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव आयोग को चुनाव प्रक्रिया के प्रति शहरी उदासीनता के मुद्दे को भी संबोधित करना चाहिए। चुनाव आयोग ने यहां आरवीएम के डेमो प्रदर्शन के लिए आठ राष्ट्रीय और 57 मान्यता प्राप्त राज्य दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया था।