छत्तीसगढ़ में शांतिपूर्ण तरीके से मतदान कराना चुनाव अयोग के लिए हमेशा से ही चुनौतीपूर्ण काम रहा है।
छत्तीसगढ़ में शांतिपूर्ण तरीके से मतदान कराना चुनाव अयोग के लिए हमेशा से ही चुनौतीपूर्ण काम रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग पहली बार बूथ स्तर पर माइक्रो प्लानिंग करने जा रहा है। इसके माध्यम से आयोग उन बिंदुओं पर ध्यान देगा जो चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं।
चुनाव आयोग के लिए नक्सली घटनाओं को रोकना भी एक चुनौती होगी और इसी बात को ध्यान में रखते हुए बूथ स्तर पर प्लानिंग का खाका तैयार किया जा रहा है। इस दौरान आयोग बूथ की सुरक्षा, रिजर्व बल की जरूरत, चुनाव कर्मचारियों को सुरक्षित लाने-लेजाने और वोटिंग मशीनों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने जैसे कामों की पूरी प्लानिंग करेगा।
चुनाव अयोग ने इस योजना की तैयारी के लिए अधिकारियों को नियुक्त किया है जो बूथ की समीक्षा करेंगे और इस पर एक रिपोर्ट तैयार करेंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर बूथ की समस्याओं को चिन्हित किया जायेगा। बूथ का निरीक्षण कर रिपोर्ट जिला निर्वाचन मुख्यालय में जमा होगी। इसके बाद चुनाव आयोग तय समय से पहले इन समस्याओं का समाधान करेगा ताकि चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से कराये जा सकें।
सुरक्षाबलों द्वारा चुनाव अधिकारियों को बूथ तक पहुंचाना भी एक बड़ी समस्या है। कई ऐसे बूथ हैं जहां तक पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं है, ऐसी स्थिति में सुरक्षाबल कई किलोमीटर पैदल चलकर और नक्सलियों से अधिकारियों को सुरक्षित रखते हुए पहुंचाने का काम करते हैं। इस प्रकार की समस्याओं से बचने के लिये इस बार चुनाव आयोग प्लानिंग कर रहा है।
जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग ने छत्तीसगढ़ के 1 करोड़ 81 लाख से अधिक मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए इस बार 23 हजार 411 मतदान केंद्र चिन्हित किये है।