एसआईआर प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में चुनाव आयोग अब छूटे और नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाएगा। बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे और फॉर्म-6 भी जमा कराएंगे। कितने नाम दोबारा जुड़ेंगे? नए वोटरों को कैसे जोड़ा जाएगा? आइए, जानते हैं...
चुनाव आयोग ने उन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में छूटे हुए पात्र मतदाताओं और नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग ने कहा है कि कोई भी पात्र नागरिक केवल एसआईआर के दौरान सूची में नाम शामिल नहीं होने के कारण मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए।
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आयोग के निर्देश राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद दिए गए। चुनाव आयोग ने दोहराया कि मतदाता पंजीकरण एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। ऐसे में एसआईआर पूरा होने के बाद भी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में जोड़े जा सकते हैं।
पुराने और नए वोटरों की होगी पहचान
विशेष अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) मौजूदा मतदाता सूची की तुलना एसआईआर से पहले की सूची से करेंगे। इसका मकसद उन मतदाताओं की पहचान करना है, जिनके नाम पहले सूची में थे लेकिन अंतिम सूची में नहीं हैं।
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पहचान किए गए लोगों के घर जाकर बीएलओ सत्यापन करेंगे। अधिकारियों को हर सप्ताह करीब 20 से 25 मतदाताओं का सत्यापन करने का लक्ष्य दिया गया है। अभियान को करीब एक महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मौके पर ही लिया जाएगा फॉर्म-6
बीएलओ नए पात्र मतदाताओं और छूटे हुए वास्तविक मतदाताओं से मौके पर ही फॉर्म-6 भरवाएंगे। एसआईआर पूरी हो चुके राज्यों में नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 से जुड़ी अतिरिक्त एसआईआर घोषणा को हटाया जा चुका है। आयोग के मुताबिक, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तैयार की गई सूचियां मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ भी साझा की जाएंगी।
विपक्ष ने लगाए थे गंभीर आरोप
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। आयोग और उसके राज्य अधिकारियों की ओर से साझा आंकड़ों के अनुसार, नौ राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों की संयुक्त मतदाता सूची में एसआईआर के बाद करीब 10.2 फीसदी की कमी आई है। इनमें 60 लाख से अधिक मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, चुनाव आयोग ने एसआईआर से जुड़े फैसलों में किसी मतभेद की बात से इनकार किया है और कहा है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।