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ECI: 'पारदर्शी चुनाव के लिए राज्य और आयोग मिलकर काम करें'; राज्यों के साथ राउंड टेबल बैठक पर बोले सीईसी

Wed, 25 Feb 2026 05:00 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

Election Commission Round Table Meeting 2026: निर्वाचन आयोग ने 27 वर्षों बाद राज्यों के साथ राष्ट्रीय गोलमेज बैठक आयोजित की। बैठक में पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और त्रुटिरहित चुनावी प्रक्रिया पर जोर दिया गया। 
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ज्ञानेश कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त - फोटो : PTI
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विस्तार
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चुनाव आयोग ने चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और जवाबदेह बनाने के लिए मंगलवार को राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया। 27 साल बाद आयोजित इस सम्मेलन में चुनाव आयोग और सभी राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त एक मंच पर थे। कार्यक्रम का आयोजन भारत मंडपम में हुआ।

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उद्घाटन भाषण में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने कहा, मतदाता चुनाव की धुरी है। उन्हें केंद्र में रख कर ही नीतियों का निर्धारण करना चाहिए। राष्ट्रीय हित और सांविधानिक समन्वय को ध्यान में रखते हुए आयोग और राज्य चुनाव आयोग मिलकर काम करें, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक विश्वसनीय बनाया जा सके। शुद्ध मतदाता सूची पारदर्शी चुनाव की आवश्यकता है। इसलिए इनकी शुद्धता पर काम करना जरूरी है। सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनी कि शुद्ध, अपडेटेड और त्रुटिरहित मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है। मतदाता सूची में समय समय पर सुधार और शुद्धिकरण अनिवार्य है। तभी कुशल, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव संचालन संभव है।

आयोग ने सुझाव दिया ईसीआईनेट, ईवीएम, मतदाता सूची प्रबंधन और आईआईआईडीईएम जैसी विश्वस्तरीय अवसंरचना को राज्यों के साथ साझा कर चुनावी प्रक्रियाओं में एकरूपता और बेहतर तालमेल स्थापित किया जाए। इसके लिए परस्पर स्वीकार्य और कानूनी रूप से व्यावहारिक ढांचा विकसित करने पर भी विचार हुआ। पंचायत और नगर निकाय चुनावों से जुड़े कानूनों के साथ लोकसभा व राज्य विधानसभाओं के चुनावी कानूनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। इससे प्रक्रियात्मक स्पष्टता और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।
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लोकतंत्रों का संगम पुस्तक का लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान लोकतंत्रों का संगम नाम की एक पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया, जो चुनावी संस्थाओं के अनुभव और सहयोग की झलक प्रस्तुत करती है। आगे की रूपरेखा के लिए सम्मेलन में प्राप्त सुझावों का विस्तृत अध्ययन करने के लिए उप निर्वाचन आयुक्तों के नेतृत्व में कानूनी और तकनीकी अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की जाएगी। यह टीम तीन माह के भीतर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अनुरूप भविष्य की कार्ययोजना तैयार कर आयोग को सौंपेगी, ताकि राष्ट्रहित में सर्वोपरि निर्णय लिया जा सके।
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