बता दें कि भारत के मुख्य चुनाव द्वारा लोकसभा चुनाव 2019 का कार्यक्रम घोषित करने के साथ ही 10 मार्च को देश में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई थी। देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग द्वारा बनाए गए नियमों को आचार संहिता कहते हैं। इसके लागू होने के साथ शासन और प्रशासन में कई बदलाव होते हैं।
देश में होने वाले सभी चुनावों से पहले चुनाव आयोग आचार संहिता (Code of Conduct) लगाता है। इस दौरान राजनीतिक दलों, उनके उम्मीदवारों और आम जनता को सख्त नियमों का पालन करना होता है। अगर कोई उम्मीदवार इन नियमों का पालन नहीं करता तो चुनाव आयोग उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। उसे चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है।
सामान्य नियम
- कोई भी दल ऐसा काम न करे, जिससे जातियों और धार्मिक या भाषाई समुदायों के बीच मतभेद बढ़े या घृणा फैले।
- राजनीतिक दलों की आलोचना कार्यक्रम व नीतियों तक सीमित हो, न कि व्यक्तिगत।
- धार्मिक स्थानों का उपयोग चुनाव प्रचार के मंच के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
- मत पाने के लिए भ्रष्ट आचरण का उपयोग न करें। जैसे-रिश्वत देना, मतदाताओं को परेशान करना आदि।
- किसी की अनुमति के बिना उसकी दीवार, अहाते या भूमि का उपयोग न करें।
- किसी दल की सभा या जुलूस में बाधा न डालें।
- राजनीतिक दल ऐसी कोई भी अपील जारी नहीं करेंगे, जिससे किसी की धार्मिक या जातीय भावनाएं आहत होती हों।
राजनीतिक सभाओं से जुड़े नियम
- सभा के स्थान व समय की पूर्व सूचना पुलिस अधिकारियों को दी जाए।
- दल या अभ्यर्थी पहले ही सुनिश्चित कर लें कि जो स्थान उन्होंने चुना है, वहॉं निषेधाज्ञा तो लागू नहीं है।
- सभा स्थल में लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति पहले प्राप्त करें।
- सभा के आयोजक विघ्न डालने वालों से निपटने के लिए पुलिस की सहायता करें।