लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के बीच बंगाल में सत्ता का संघर्ष तेज हो गया है। एक तरफ चुनाव आयोग ने नई विधानसभा के गठन पर मुहर लगा दी है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी के बयान ने संविधानिक संकट और राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। इस बीच चुनाव आयोग ने सभी चुनावी राज्यों के राज्यपालों को अधिसूचना भेज दी है।
चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया के संपन्न होते ही नई सरकारों के गठन की संविधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। चुनाव परिणाम घोषित होने के ठीक एक दिन बाद निर्वाचन आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के राज्यपालों को नई विधानसभाओं के गठन की अधिसूचना भेज दी है। पुदुचेरी के उपराज्यपाल को भी इसी तरह की अधिसूचना भेजी गई है।
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विधानसभाओं के कार्यकाल का विवरण
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की वर्तमान विधानसभाओं का कार्यकाल सात मई से 15 जून, 2026 के बीच समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग की इस अधिसूचना के बाद अब विजयी दलों के नेताओं के लिए सरकार बनाने का दावा पेश करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। समय सीमा की बात करें तो पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल सात मई को समाप्त हो रहा है। तमिलनाडु का 10 मई, असम का 20 मई, केरल का 23 मई और पुदुचेरी का कार्यकाल 15 जून को खत्म होगा।
बंगाल में मुख्यमंत्री का कड़ा रुख
जहां अन्य राज्यों में प्रक्रिया सामान्य दिख रही है, वहीं पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है। उन्होंने फिलहाल अपने पद से इस्तीफा देने से साफ मना कर दिया है। ममता बनर्जी ने साफ-साफ कहा कि वह स्वेच्छा से राज्यपाल को इस्तीफा नहीं सौंपेंगी।
स्टालिन और विजयन का विपरीत आचरण
ममता बनर्जी का यह रुख तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से बिल्कुल अलग है। इन दोनों नेताओं ने चुनाव में अपनी हार स्वीकार कर ली है। उन्होंने लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करते हुए अपने संबंधित राज्यपालों को त्यागपत्र सौंप दिए हैं। उधर, ममता बनर्जी अब केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने और आंदोलन छेड़ने की रणनीति पर जोर दे रही हैं।