महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लिए शुक्रवार को राहत भरी खबर आई। उद्धव की सीएम कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा खत्म होता हुआ दिख रहा है। दरअसल, भारतीय चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र में विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव कराने का फैसला किया है। चुनाव आयोग ने विधान परिषद की नौ सीटों पर चुनाव की तिथि 21 मई तय की है। इससे पहले यह चुनाव तीन अप्रैल को होने वाले थे लेकिन कोरोना वायरस संकट की वजह से इन्हें टाल दिया गया था।
उद्धव ठाकरे ने पिछले साल 28 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। संविधान के तहत मुख्यमंत्री या मंत्री को शपथ लेने के छह माह के अंदर विधान सभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी है। ठाकरे अभी तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। इसलिए 28 मई से पहले उनका विधायक बनना जरूरी है। विधायक नहीं बनने पर उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा। इसके बाद पुनः सरकार गठन की प्रक्रिया राज्यपाल के फैसले पर निर्भर होगा।
ठाकरे ने राज्यपाल कोश्यारी से की मुलाकात
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से शुक्रवार को मुंबई स्थित राज भवन में मुलाकात की। राज भवन से जारी एक बयान में बताया गया कि यह बैठक करीब 20 मिनट तक चली। बैठक के दौरान, ठाकरे ने महाराष्ट्र राज्य के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर राज्यपाल को बधाई दी और बदले में शुभकामनाएं स्वीकार की।
राज्यपाल कोश्यारी ने की थी चुनाव कराने की मांग
राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर कहा था कि महाराष्ट्र में राजनीतिक स्थिरता के लिए विधान परिषद की रिक्त नौ सीटों के लिए चुनाव की घोषणा की जाए। इन सीटों का कार्यकाल 24 अप्रैल को समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार ने कोरोना संकट में जारी लॉकडाउन को सरल करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसी दिशा-निर्देश के तहत केंद्र सरकार से बातचीत कर चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। चूंकि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अभी विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं इसलिए 27 मई से पहले उन्हें सदन का सदस्य चुना जाना आवश्यक है।
उद्धव ने पीएम मोदी से भी की थी फोन पर बात
चुनाव आयोग द्वारा तिथि तय किए जाने से पहले राज्यपाल के अनिश्चय की स्थिति को देखते हुए अचानक राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई थी। उद्धव ठाकरे ने एमएलसी मनोनीत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की थी। चर्चा है कि उद्धव ने मोदी से कहा था कि देश में कोरोना संकट के बीच राज्य को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, पीएम मोदी ने उन्हें इस पर गौर करने का आश्वासन दिया था।