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SIR: एसआईआर पर मद्रास हाईकोर्ट में ईसी ने दी सफाई, कहा- प्रक्रिया को लेकर किसी आशंका की जरूरत नहीं

Mon, 03 Nov 2025 10:20 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि तमिलनाडु में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण मंगलवार से शुरू होगा। प्रत्येक मतदाता को फॉर्म भरना होगा और 9 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी और उसके बाद आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी।
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इन 12 राज्यों में एसआईआर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत के चुनाव आयोग ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट में कहा कि मतदाता सूचियों की एसआईआर प्रक्रिया को लेकर किसी आशंका की जरूरत नहीं है। आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

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चुनाव आयोग के वकील निरंजन राजगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की पीठ के समक्ष यह दलील दी। पीठ अन्नाद्रमुक के पूर्व विधायक सत्यनारायणन और पार्टी के वकील विनयगम की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें चुनाव आयोग को टी नगर और तांबरम विधानसभा क्षेत्रों में दोहरी प्रविष्टियों और मृत मतदाताओं के नामों को हटाने के उनके अनुरोध पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि तमिलनाडु में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण मंगलवार से शुरू होगा। प्रत्येक मतदाता को फॉर्म भरना होगा और 9 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी और उसके बाद आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी। इसके बाद ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। आयोग ने कहा कि 1950 से अब तक ऐसी 10 बार मतदाता सूची प्रकाशित हो चुकी है। तमिलनाडु में यह प्रक्रिया 2005 के बाद शुरू हो रही है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर तक स्थगित कर दी।
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एसआईआर के खिलाफ डीएमके पहुंची सुप्रीम कोर्ट
तमिलनाडु में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने के निर्वाचन आयोग के फैसले के खिलाफ सत्तारूढ़ डीएमके ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। डीएमके ने आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए इस प्रक्रिया को असांविधानिक, मनमाना और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताया।

डीएमके के संगठन सचिव आरएस भारती की ओर से दायर याचिका में राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए चुनाव आयोग की 27 अक्तूबर की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 (समानता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन का अधिकार) और अन्य प्रावधानों, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और 1960 के मतदाता पंजीकरण नियमों का उल्लंघन बताया गया है। 

इस याचिका पर इस हफ्ते सुनवाई होने की संभावना है। याचिका में कहा गया है कि एसआईआर के परिणामस्वरूप लाखों वास्तविक मतदाताओं को मनमाने ढंग से हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया अनुचित दस्तावेजीकरण आवश्यकताओं को लागू करती है और इसमें प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का अभाव है। यदि एसआईआर और आदेशों को रद्द नहीं किया जाता है, तो मनमाने ढंग से और उचित प्रक्रिया के बिना, लाखों मतदाताओं को अपने प्रतिनिधियों को चुनने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है। जिससे देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र बाधित हो सकता है, जो संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा हैं।

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