आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग ने सरकार से अपनी शक्तियों को बढ़ाने की मांग की है जिससे कि अखबारों में आने वाले राजनीतिक प्रचारों पर रोक लगाया जा सके। साथ ही आयोग के निर्देशों का उल्लंघन करने वालों पर विधिक कार्रवाई भी की जा सके।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक आयोग ने इसके लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन कर स्थायी कानूनी अधिकार दिये जाने की सिफारिश की है। चुनाव आयोग ने पिछले साल हुए बिहार चुनाव के दौरान एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए समाचार पत्रों में निकलने वाले राजनीतिक प्रचारों पर संविधान की धारा 324 के अंतर्गत रोक लगा दिया था। यह प्रचार 4 नवंबर 2015 को राज्य के चार बड़े हिन्दी दैनिकों में छापे गए थे जिसमें 'गाय' के मुद्दे को प्रचारित किया गया था।