महज रजिस्ट्रेशन कराने लेकिन चुनाव से दूर रहे राजनीतिक दलों के खिलाफ चुनाव आयोग ने सीधी कार्रवाई की है। आयोग ने शुक्रवार को ऐसे 225 दलों को अपनी सूची से हटा दिया है। चूंकि आयोग के पास राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार नहीं है लिहाजा उनके खिलाफ यह कार्रवाई की है। आयोग इससे पहले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को इन दलों के वित्तीय ब्योरे की जांच का निर्देश जारी कर चुका है।
जिन दलों को सूची से हटाया गया है उनमें 52 दिल्ली से तो 41 ने उत्तर प्रदेश के पते से अपना पंजीकरण करा रखा था। इन दलों ने न तो बीते दस सालों में किसी चुनाव में भागीदारी की और न ही अपना वित्तीय लेखा-जोखा ही आयोग को दिया है। चूंकि इन दलों के पंजीकरण में दर्ज पते भी अब फर्जी पाए गए हैं। ऐसे में संदेह है कि सियासी दल होने की आड़ में इन्होंने नोटबंदी के दौरान कालेधन को सफेद करने का खेल किया हो।
आयोग के सूत्रों ने बताया कि चूंकि उसके समक्ष किसी भी दल का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में उसने संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए ऐसे दलों को असूचीबद्ध कर दिया है। गौरतलब है कि आयोग अरसे से दलों के पंजीकरण रद्द करने का अधिकार देने की मांग करता रहा है। हालांकि आयेग का इस आशय का प्रस्ताव अब तक कानून मंत्रालय के पास लंबित है।
देश में राजनीतिक दलों की संख्या
देश में राजनीतिक दलों की संख्या
- चुनाव आयोग के अनुसार देश में इस समय पंजीकृत राजनीतिक दलों की संख्या 1851 है।
- इनमें सात राष्ट्रीय, 5 8राज्य स्तरीय दल, जबकि शेष 1786 गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत दल थे।
- 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के समय 464 राजनीतिक दलों ने उम्मीदवार खड़े किए थे।
- 10 मार्च 2014 तक देश में ऐसे राजनीतिक दलों की संख्या 1593 थी।
- 30 मार्च 2014 तक चुनाव आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दलों की संख्या 1627 थी।
- मार्च 2014 से जुलाई 2015 तक आयोग में 239 राजनीतिक दल और पंजीकृत हुए।
- गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को अपने पसंद के चिह्न पर चुनाव लड़ने की सुविधा नहीं होती है। उन्हें मुक्त चिह्न की सूची में से चुनना पड़ता है।
- चुनाव आयोग के ताजा परिपत्र में ऐसे 84 मुक्त चिह्न उपलब्ध हैं।
राजनीतिक चंदे पर सुनवाई 11 जनवरी को
नई दिल्ली। राजनीतिक दलों को 20 हजार रुपये तक चंदा देने वाले लोगों के नामों का खुलासा न करने की छूट को चुनौती देनी वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार किया है। आयकर अधिनियम के प्रावधान के तहत राजनीतिक दलों को यह छूट मिली हुई है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अवकाशकालीन पीठ ने याचिकाकर्ता वकील से मनोहर लाल शर्मा की याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि आयकर अधिनियम का यह प्रावधान वर्ष 1961 से है। याचिकाकर्ता ने पीठ से याचिका पर जल्द सुनवाई की गुहार करते हुए कहा कि राजनीतिक दल नोटबंदी का फायदा उठा रहे हैं। राजनीतिक दलों के खातों में बड़ी संख्या में 20 हजार रुपये तक की राशि जमा हो रही है। याचिकाकर्ता ने याचिका पर तीन जनवरी को सुनवाई करने की गुहार की। इस पर पीठ ने कहा कि पिछले 50 सालों से यह कानून प्रभावी है। बाद में पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए 11 जनवरी की तारीख मुकर्रर कर दी।
राजनीतिक दलों के चंदे की क्या है स्थिति
- फोटो : अमर उजाला
राजनीतिक दलों के चंदे की क्या है स्थिति
- क्षेत्रीय व राष्ट्रीय पार्टियों ने बीते 12 साल में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में 5723 करोड़ रुपये का चंदा लिया।
- इनमें से 2355 करोड़ का चंदा तीन लोकसभा और 3368 करोड़ रुपये का चंदा 71 विधानसभा चुनावों में मिला।
- विधानसभा चुनावों में 63 फीसदी और लोकसभा चुनावों में 44 प्रतिशत चंदा नकद लिया गया।
- 2004 और 2015 के बीच राजनीतिक दलों ने अपना कुल धन 1535 दिन की चुनाव अवधि में एकत्रित किया।
- पार्टियों ने लोकसभा चुनावों में 2466 करोड़ और विधानसभा चुनावों में 2827 करोड़ रुपये खर्च किए।
- 20 हजार से ज्यादा चंदा देने वाले दान दाताओं की सूचना चुनाव आयोग को देनी होती है।
- मौजूदा प्रावधानों का फायदा उठाते हुए दल अधिकांश आय का खुलासा नहीं करते। पार्टियां दावा करती हैं कि यह रकम उन्हें 20 हजार से कम के चंदे में मिली है।
वर्ष 2015-16
राजनीतिक दलों को 528.67 करोड़ रुपये का चंदा मिला।
भाजपा को 76.85 करोड़, कांग्रेस को 20.42, एनसीपी को 0.71, टीमएसी को 0.65, माकपा को 1.81 तथा भाकपा को 1.58 करोड़ रुपये मिले।