Election Commission of India, Supreme Court of India
केंद्र सरकार ने कहा है कि
चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था है लेकिन उसे कानून बनाने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। सरकार ने कहा है कि चुनाव सुधार को लेकर सभी फैसले लेने का अधिकार संसद केपास है।
सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर सरकार ने कहा है कि चुनाव आयोग को कानून बनाने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। कानून बनाना संसद का काम है। यह पॉलिशी मैटर है और कार्यपालिका केअधिकारक्षेत्र में है। सरकार ने कहा है चुनाव आयोग की तुलना लोकसभा व राज्यसभा से नहीं की जा सकती। संविधान में सभी के कार्यों का बंटवारा किया गया है।
साथ ही सरकार ने यह भी कहा है कि चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त केबराबर अधिकार नहीं दिया जा सकता। चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त के समान संरक्षण नहीं दिया जा सकता। चुनाव आयोग का काम निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव करना है और आयोग का काम बिना किसी रुकावट केचल रहा है।
केंद्र सरकार ने यह जवाब भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की उस जनहित याचिका पर दिया है जिसमें गुहार की गई है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की जो प्रक्रिया है वहीं प्रक्रिया चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए भी होनी चाहिए।
इससे पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि उसे कानून बनाने का अधिकार मिलना चाहिए, जो फिलहाल केंद्र सरकार केपास है। आयोग ने कहा था कि उसे और स्वायत्तता की दरकार है।
वर्ष 1998 से लगातार आयोग को और स्वायत्त देने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। आयोग ने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को जिस तरह से संरक्षण मिला हुआ है उसी तरह का संरक्षण चुनाव आयुक्तों को भी मिलना चाहिए।