30 अक्तूबर 2023 को आरोपी इस्माइल कालू शेख पड़ोस में रहने वाली दो लड़कियों को मानपाड़ा इलाके में अपने घर ले गया और उनका यौन उत्पीड़न किया। तब दोनों बच्चियों में एक की उम्र पांच और सात साल थी। बाद में लड़कियों में से एक ने अपनी मां को घटना की जानकारी दी। कोर्ट ने वृद्ध को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया।
महाराष्ट्र के ठाणे में 61 साल के बुजुर्ग व्यक्ति ने दो मासूम बच्चियों का यौन उत्पीड़न किया। कोर्ट ने वृद्ध को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया।
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विशेष लोक अभियोजक विवेक कडू ने अदालत को बताया कि 30 अक्तूबर 2023 को आरोपी इस्माइल कालू शेख पड़ोस में रहने वाली दो लड़कियों को मानपाड़ा इलाके में अपने घर ले गया और उनका यौन उत्पीड़न किया। तब दोनों बच्चियों में एक की उम्र पांच और सात साल थी। बाद में लड़कियों में से एक ने अपनी मां को घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिजनों ने एक नवंबर 2023 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने विवेचना के दौरान पीड़िताओं की चिकित्सा जांच, घटनास्थल का पंचनामा (मौके का निरीक्षण) और गवाहों के बयान दर्ज किए। मामले की ठाणे की एक अदालत में सुनवाई हुई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एएस भागवत ने 15 मार्च को आदेश में आरोपी इस्माइल कालू शेख को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया और उस पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने शेख की खराब पारिवारिक पृष्ठभूमि और पिछले आपराधिक रिकॉर्ड की कमी का हवाला देते हुए परिवीक्षा में नरमी बरतने का अनुरोध किया। मगर न्यायाधीश भागवत ने अपराध की गंभीरता पर जोर देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि अपराधियों की परिवीक्षा अधिनियम के प्रावधानों के लाभों का विस्तार आरोपी के पक्ष में किया जा सकता है। लेकिन अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ आरोपों को सफलतापूर्वक साबित कर दिया है। इसलिए उसे दोषी ठहराया जाना चाहिए और सजा सुनाई जानी चाहिए।
अदालत ने पॉक्सो अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम सजा सुनाई। अदालत ने आदेश दिया कि एक बार आरोपी से जुर्माना राशि वसूल हो जाने के बाद दोनों पीड़ितों को मुआवजे के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान किया जाए। अभियोजक ने कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए मुकदमे के दौरान पीड़ितों, एक चिकित्सा अधिकारी, पीड़ितों के माता-पिता और एक जांच अधिकारी सहित कुल सात गवाहों के बयान लिए गए।