देश में खेती-बाड़ी पर मौसम की मार भारी पड़ती नजर आ रही है। अलनीनो के प्रभाव से कमजोर और अनिश्चित रहे मानसून ने चालू खरीफ सीजन की कमर तोड़ दी है। वहीं, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले साल तक सक्रिय रहने वाले अलनीना के प्रभाव से आगामी रबी सीजन पर भी गहरा संकट मंडराने लगा है। खरीफ में धान की बुआई घटने से जहां बाजार में चावल के दाम बढ़ने की संभावना है, वहीं रबी में गेहूं और अन्य प्रमुख अनाजों के उत्पादन में गिरावट की प्रबल आशंका जताई जा रही है।
मानसून की बेरुखी से उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में मानसूनी बारिश में कमी दर्ज की गई। इसका सीधा असर खरीफ की फसलों की बुआई पर पड़ा और धान का रकबा घट गया। इसके साथ ही मंडियों में पहुंचे धान का बड़ा हिस्सा बेमौसम बारिश में भीग गया। चावल पहले ही एक साल में करीब 10 फीसदी तक महंगा हो गया था, अब आगे इसमें और तेजी के आसार हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ की आमद और रबी की बुवाई में भी नरमी रही तो चावल का संकट और महंगाई दोनों बढ़ना तय है। आईआईटी गांधीनगर के भारत सूखा निगरानी केंद्र के मुताबिक देश का 70.6% हिस्सा सूखे की चपेट में है। देश में सामान्य से 13% कम बारिश हुई है। पंजाब में करीब 33%, उत्तर प्रदेश में 25%, हरियाणा में सितंबर तक 27 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।
धान का रकबा 16.37 लाख हेक्टेयर घटा
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार देशभर में धान का रकबा 438.19 लाख हेक्टेयर से घटकर 421.82 लाख हेक्टेयर रह गया, यानी 16.37 लाख हेक्टेयर की कमी। यूपी के पूर्वी और तराई वाले प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में धान का रकबा 1.84 लाख हेक्टेयर घटकर 59.8 लाख हेक्टेयर रह गया। हरियाणा में धान का उत्पादन पिछले साल के 97.05 लाख टन की तुलना में इस साल 70-75 लाख टन रहने का अनुमान है।
- 13 % कम बारिश हुई देश में सामान्य की तुलना में।
- 5% से 7% की गिरावट संभावित रबी की पैदावार में।
बाजार में दिखने लगा असर
- मंडियों में धान का भाव एमएसपी से 1,500 रुपये ऊपर।
- चावल के दामों में 10% से 15% तक बढ़ोतरी की संभावना।
- सोना मसूरी, पोन्नी और स्वर्णा किस्मों के दाम 10-25% बढ़े।
चावल का खुदरा मूल्य 10 फीसदी तक बढ़ा
खरीफ की फसल अभी ठीक से बाजार में आई भी नहीं, पर घटी पैदावार के अनुमानों ने खुदरा भाव चढ़ा दिए हैं। चावल का औसत भाव 46.92 रुपये प्रति किलो हो गया है, जो पिछले साल से करीब 10% ज्यादा है। तिरुपति एग्री ट्रेड लि. के सीईओ सूरज अग्रवाल के अनुसार, अलनीनो से चावल उत्पादन 3 से 4 फीसदी घट सकता है। युद्ध और अनिश्चितता के कारण कई देश भंडार सुरक्षित कर रहे हैं, जिससे मांग बढ़ी है।
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विशेषज्ञ बोले...जल्दबाजी में नतीजे निकालना ठीक नहीं
पूसा के वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्पादन घटेगा, पर आपूर्ति पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि देश में पर्याप्त भंडार है। धान विशेषज्ञ चौधरी रामचेत का कहना है कि अभी कमी के केवल अनुमान हैं और अंतिम तस्वीर कटाई के बाद ही साफ होगी। अगेती और पछेती किस्मों का संतुलन नुकसान की भरपाई भी कर सकता है। काला नमक चावल पर बड़ा असर नहीं पड़ा है।
निर्यातकों के मुनाफे पर दबाव : पंजाब के आईआरईएफ अध्यक्ष अमन सिंगल ने कहा, भारत की प्रतिस्पर्धी कीमतों ने बासमती और गैर-बासमती दोनों वैश्विक बाजारों में पकड़ बना रखी है। लेकिन धान की बढ़ती लागत और फसल की अनिश्चितता के कारण निर्यातकों के मुनाफे पर सबसे ज्यादा दबाव है। इसका असर निर्यात पर भी पड़ सकता है।
गेहूं, सरसों और चने की बुआई पर संकट
विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी रबी सत्र में गेहूं सहित अन्य प्रमुख अनाजों के उत्पादन में गिरावट आने की आशंका तेज हो गई है। कम बारिश के चलते पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 50 से 70 फीसदी से ज्यादा इलाका सूखा प्रभावित माना जा रहा है। इसके अलावा, इन राज्यों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे सिंचाई के लिए पानी की भारी किल्लत है।