आने वाले महीनों में पूरी दुनिया को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के गर्म होने की संभावना बढ़ रही है। इसका असर भारत सहित पूरी दुनिया पर पड़ेगा। जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अल नीनो के की एक बार फिर वापसी के कारण होगा। अल नीनो के कारण वैश्विक तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी। भारत में मानसून पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने बताया है कि अल नीनो अब जुलाई के अंत तक आ सकता है। डब्ल्यूएमओ ने यह भी कहा है कि जुलाई में इसके आने की संभावना 60 प्रतिशत और सितंबर के अंत तक 80 प्रतिशत संभावना है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के क्षेत्रीय जलवायु पूर्वानुमान सेवा प्रभाग के प्रमुख विल्फ्रान मौफौमा ओकिया ने स्विट्जरलैंड में जिनेवा में इसके बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह दुनिया भर में मौसम और जलवायु के पैटर्न को बदल देगा।
IMD के महानिदेशक ने भारत में मानसून पर अल नीनो के प्रभाव के बारे में बताया
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने पिछले सप्ताह भारत में मानसून पर अल नीनो के प्रभाव को लेकर कहा था कि अल नीनो का मानसून पर कोई भी प्रभाव आधा मानसूनी सीजन बीत जाने के बाद ही दिखाई देगा। उन्होंने कहा था कि यह जरूरी नहीं है कि अल नीनो खराब मानसून की ओर ले जाएगा। 1951 से 2022 तक के 15 अल नीनो सालों में सामान्य से अधिक बारिश वाले छह साल थे।
पिछले आठ साल सबसे गर्म
अब तक रिकॉर्ड पर दुनिया का सबसे गर्म वर्ष 2016 था। यह अल नीनो की वजह से ही दर्ज किया गया था। हालांकि, अभी की बात करें तो जलवायु परिवर्तन की घटना के कारण तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में अल नीनो के बिना ही आप रिकॉर्ड वृद्धि देख सकेंगे। गौरलतब है पिछले आठ साल दुनिया के सबसे गर्म थे।
क्या है अल नीनो?
प्रशांत महासागर में पेरू के निकट समुद्री तट के गर्म होने की घटना को अल-नीनो कहा जाता है। आसान भाषा में समझे तो समुद्र का तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में जो बदलाव आते हैं उस समुद्री घटना को अल नीनो का नाम दिया गया है। इस बदलाव के कारण समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री ज्यादा हो जाता है।
अल नीनो का मौसम पर क्या पड़ता है असर?
अल नीनो के कारण प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है यानी गर्म हो जाता है। इस परिवर्तन के कारण मौसम चक्र बुरी तरह से प्रभावित होता है। अल नीनो का असर दुनिया भर में महसूस किया जाता है, जिसके कारण बारिश, ठंड, गर्मी सब में अंतर दिखाई देता है। मौसम के बदल जाने के कारण कई स्थानों पर सूखा पड़ता है तो कई जगहों पर बाढ़ आती है। जिस साल अल नीनो की सक्रियता बढ़ती है, उस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून पर इसका असर पड़ता है। इससे धरती के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा होती है तो कुछ हिस्सों में सूखे की गंभीर स्थिति सामने आती है। हालांकि, कभी-कभी इसके सकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं, उदाहरण के तौर पर अल नीनो के कारण अटलांटिक महासागर में तूफान की घटनाओं में कमी आती है।