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अल निनो ने किसान को बनाया मजदूर

Mon, 21 Mar 2016 01:58 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली

सार

  • अन्नदाता किसान खेत के बजाय बाजार से खरीद रहा अन्न
  • दुनिया भर में खेती-किसानी से दरबदर हो रहे करोड़ों किसान
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मौसम बदला, किसान परेशान
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विस्तार
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भारत समेत दुनिया भर के करोड़ों किसानों पर मौसम की भयानक मार पड़ रही है। मौसम की यह बेरहमी इतनी ज्यादा है कि लाचार किसानों को मजबूरन मजदूर बनना पड़ रहा है। अब तो हालात इस कदर भयावह हो चुके हैं कि अन्नदाता कहे जाने वाले किसान को खुद ही बाजार से अन्न और सब्जियां खरीदनी पड़ रही हैं।
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किसान की ऐसी हालत के लिए और कोई नहीं मौसम चक्र को प्रभावित करने वाले कारक अल निनो जिम्मेदार है। भरी-पूरी फसल उगाने के किसान के सपने पर पानी फिर जा रहा है। लगातार भीषण सूखा पड़ रहा है या फिर बेमौसम बरसात हो रही है, जो खेती और किसान को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है।

किसान हर बार कर्ज लेकर यह सोचकर खेती में पैसा लगाता है कि अब की बार उसके सपनों की फसल लहलहाएगी, मगर हाल फिर वही ढाक के तीन पात। नतीजा यह होता है कि बेचारा किसान या तो कर्ज न चुका पाने के बोझ से आत्महत्या कर लेता है या फिर खेती से दरबदर होकर मजदूर बन जाता है। 
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मौसम ने बिगाड़ी छह करोड़ लोगों की सेहत 

बरसात ने बर्बाद की करोड़ों की फसल
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के मुताबिक, अल निनो की वजह से बिगडे़ मौसम ने दुनिया भर में छह करोड़ लोग कुपोषित होने को मजबूर। ऐसे लोगों को पानी, मच्छरजनित बीमारियां और दूसरे रोगों का सामना करना पड़ रहा है। 

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी विश्व खाद्य कार्यक्रम में जलवायु विश्लेषक रोगेरियो बोनीफेसियो का कहना है कि जो चीजें पहले किसान उगाता था, अब उसे बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। उदाहरण के तौर पर दक्षिण अफ्रीका में भीषण सूखे की मार झेल रहे किसान बीते कुछ सालों से ब्राजील जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों से लाखों टन मक्का आयात कर रहे हैं, जबकि पहले वह इतना मक्का उगाते थे कि उसे एशियाई बाजारों को निर्यात किया करते थे।

भारत में तो मानसून की बार-बार कमी ने किसानों को बर्बाद कर दिया है। जिसके चलते वह मजदूर बनता जा रहा है। बीते साल अमेरिका के कैलिफोर्निया में जबरदस्त ठंड, ऑस्ट्रेलिया-अफ्रीका में सूखा और दक्षिण अमेरिकी देशों में मौसमी घटनाओं ने अल निनो की भयावहता को साबित किया है।

एक अल निनो औसतन हर दो से सात साल में उस वक्त आता है, जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इससे भारत में मानसून और बाकी दुनिया में मौसम का मिजाज बिगड़ जाता है और ऊंचे स्थानों पर चलने वाली जेट स्ट्रीम हवाओं का संतुलन बिगड़ जाता है। नतीजतन  कहीं बेमौसम की भारी बारिश तो कहीं भीषण सूखा पड़ने लग जाता है। 
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