महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला। दशहरा रैली के दौरान शिंदे ने आरोप लगाया कि ठाकरे ने 2019 में जनता के जनादेश के साथ धोखा किया और पिछले दरवाजे से मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल की। उपमुख्यमंत्री शिंदे ने 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद गठबंधन बदलने के उद्धव ठाकरे के फैसले को लेकर भी सीधे सवाल उठाए।
'2019 में हुआ राजनीतिक बदलाव मतदाताओं के साथ खुला विश्वासघात था'
शिंदे ने ठाकरे पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया, 'आप (उद्धव ठाकरे) पिछले दरवाजे से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। वोटों की सबसे बड़ी चोरी 2019 में हुई थी, जब आपने भारतीय जनता पार्टी के नाम पर चुनाव लड़ा और बाद में महाविकास आघाड़ी के साथ मिलकर सरकार बना ली। यह मतदाताओं के साथ गंभीर विश्वासघात था।'
विपक्ष को घेरा
मुंबई में अपनी पार्टी की दशहरा रैली को संबोधित करते हुए शिवसेना प्रमुख ने कहा कि सरकार और उनकी पार्टी पानी की कमी के कारण फसलों का नुकसान झेल रहे किसानों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। शिंदे ने कांग्रेस पर 70 वर्षों तक देश को लूटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले बूथ कैप्चरिंग के जरिए चुनाव जीतने वाली कांग्रेस अब मतपत्रों से मतदान कराने की मांग कर रही है। शिंदे ने कहा, 'यह दोहरा मापदंड है और हर दिन नया नाटक किया जा रहा है। इंडिया गठबंधन दस सिर वाला रावण है और हमें उसका पुतला जलाने की जरूरत है।'
'भारत में अराजकता फैलाना चाहता है विपक्ष'
बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन को लेकर विपक्षी नेताओं की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए शिंदे ने उन पर भारत में अराजकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'यह हिंदुस्तान है, नया भारत है। यह ऐसा भारत है, जो पाकिस्तान में घुसकर कार्रवाई करता है।' शिंदे ने कहा, 'मैं बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैं किसानों को केवल 'भाषण' नहीं देता, बल्कि उन्हें राशन भी देता हूं।' उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग केवल भाषण देने का काम करते हैं।'
'किसानों की मदद करने का समय, आरोप-प्रत्यारोप का नहीं'
अपने खिलाफ लगातार हो रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री शिंदे ने किसानों के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र इस समय सूखे जैसी परिस्थितियों और कृषि संकट का सामना कर रहा है। शिंदे ने कहा, 'आज शिवसेना के 60 वर्ष पूरे हो रहे हैं और हम अपनी परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। किसान संकट में हैं और महाराष्ट्र पर सूखे का साया मंडरा रहा है। यह आरोप-प्रत्यारोप में उलझने का नहीं, बल्कि किसानों की मदद के लिए आगे आने का समय है।'
खुद को किसान का बेटा बताते हुए शिंदे ने कहा कि वह जमीनी स्तर पर किसानों की पीड़ा को समझते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं केवल भाषण देने वालों में से नहीं हूं। हम लोगों तक राशन पहुंचाने वाले हैं। जब मैं मुख्यमंत्री था, तब मैंने किसानों को राहत पहुंचाने के लिए नौकरशाही की औपचारिक प्रक्रियाओं से हटकर फैसले लिए थे। किसानों के बच्चों की शिक्षा और उनकी शादियों की जिम्मेदारी उठाना शिवसेना का कर्तव्य है।'
'पांच हजार रुपये की राशि तत्काल राहत के लिए'
विपक्ष की ओर से किसानों को पांच हजार रुपये की वित्तीय सहायता देने के फैसले की आलोचना किए जाने पर उपमुख्यमंत्री ने इस राशि और ग्रामीण क्षेत्रों को सहायता पहुंचाने की सरकार की योजना का बचाव किया। उन्होंने शुरुआती वित्तीय सहायता पर सवाल उठाने वाले आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि पांच हजार रुपये की राशि आपात स्थिति में तत्काल राहत प्रदान करने के उद्देश्य से दी जा रही है।
शिंदे ने बताया कि राज्य सरकार ने किसानों की कर्जमाफी के लिए 32 हजार करोड़ रुपये की एक बड़ी रूपरेखा की घोषणा की है।
'क्या आपने कभी किसानों को बिस्कुट का एक पैकेट भी बांटा?'
अपने राजनीतिक विरोधियों पर तंज कसते हुए उपमुख्यमंत्री ने पूछा, 'क्या आपने कभी किसानों को बिस्कुट का एक पैकेट भी बांटा है? उनकी फसलें सूखकर बर्बाद हो गई हैं और आप केवल विरोध प्रदर्शन करते रहते हैं।' शिंदे ने कहा कि वह अपने राजनीतिक विरोधियों के साथ रोजाना की बयानबाजी में उलझने के बजाय विकास कार्यों और जमीनी स्तर पर किए जा रहे प्रयासों से उन्हें जवाब देंगे।