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Maharashtra: 'एकनाथ खडसे-गिरीश महाजन के बीच मतभेद खत्म हो जाए तो...', जलगांव के विकास पर बोलीं केंद्रीय मंत्री

Thu, 05 Sep 2024 02:23 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

एकनाथ खडसे ने पिछले साल अक्तूबर में भाजपा से राकांपा में शामिल हुए थे। उन्होंने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस पर उनके जीवन और राजनीतिक करियर को नष्ट करने का आरोप लगाया था। इसके अलावा उनकी गिरीश महाजन से भी अनबन चल रही है।
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रक्षा खडसे - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे मे महाराष्ट्र में जलगांव जिले के विकास पर बात की। उन्होंने कहा कि अगर उनके ससुर एकनाथ खडसे और राज्य मंत्री गिरीश महाजन आपसी मतभेद भूलकर एकसाथ काम करें तो इससे जलगांव के विकास में मदद मिलेगी। दरअसल, खडसे और महाजन दोनों ही जलगांव के रहने वाले हैं। जहां खडसे मुक्ताईनगर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं तो महाजन जामनेर सीट से विधायक हैं। बता दें कि हाल ही में एकनाथ खडसे ने राकांपा-एसपी से भाजपा में शामिल होने की इच्छा जताई थी।
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भाजपा में शामिल होने की जताई थी इच्छा
एकनाथ खडसे ने पिछले साल अक्तूबर में भाजपा से राकांपा में शामिल हुए थे। उन्होंने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस पर उनके जीवन और राजनीतिक करियर को नष्ट करने का आरोप लगाया था। इसके अलावा उनकी गिरीश महाजन से भी अनबन चल रही है। इस साल लोकसभा चुनाव से पहले खडसे ने भाजपा में शामिल होने की इच्छा जताई थी। हालांकि, भाजपा अभी भी इसे लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। खडसे ने चेतावनी दी थी कि अगर उन्हें फिर से पार्टी में शामिल करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो वह आगामी चुनाव के लिए राकांपा-एसपी के लिए प्रचार करना शुरू कर देंगे। 

जलगांव के विकास पर क्या बोलीं रक्षा खडसे?
विकास पर पत्रकारों से बात कर हुए केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे ने कहा, "अगर एकनाथ खडसे और गिरीश महाजन के बीच आपसी मतभेद खत्म हो जाए तो जलगांव को विकास में मदद मिलेगी।" उन्होंने आगे कहा, "एकनाथ खडसे ने भाजपा में फिर से शामिल होने पर फैसला लेंगे। मैं इसपर कोई बयान नहीं दूंगी, लेकिन अगर एकनाथ खडसे और गिरीश महाजन एकजुट होकर काम करेंगे तो यह जलगांव के विकास के लिए अच्छा होगा। उन्हें एकसाथ बैठकर समाधान ढूंढने होंगे।" 
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बता दें कि मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस के कार्यकाल के दौरान खडसे एक प्रमुख ओबीसी नेता थे। भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। विधानसभा चुनाव 2019 में उन्हें टिकट भी नहीं दिया गया। मुक्ताईनगर से उनकी बेटी रोहिणी खडसे को टिकट मिला था। हालांकि, रोहिणी को शिवसेना उम्मीदवार के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
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