फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Goa: कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए आठ विधायक नहीं होंगे अयोग्य, गोवा विधानसभा अध्यक्ष ने खारिज की याचिका

Fri, 01 Nov 2024 11:15 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी

सार

गोवा कांग्रेस पूर्व प्रमुख ने विधायक दिगंबर कामत, एलेक्सो सेक्वेरा, संकल्प अमोनकर, माइकल लोबो, डेलिलाह लोबो, केदार नाइक, रुडोल्फ फर्नांडीस और राजेश फलदेसाई के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की थी।
विज्ञापन
गोवा विधानसभा अध्यक्ष रमेश तावड़कर। - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गोवा में 2022 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस के आठ बागी विधायक अयोग्य घोषित नहीं होंगे। गोवा विधानसभा के अध्यक्ष रमेश तावड़कर ने कांग्रेस के पूर्व प्रमुख गिरीश चोडानकर की अयोग्यता याचिका खारिज कर दी। गोवा कांग्रेस पूर्व प्रमुख ने विधायक दिगंबर कामत, एलेक्सो सेक्वेरा, संकल्प अमोनकर, माइकल लोबो, डेलिलाह लोबो, केदार नाइक, रुडोल्फ फर्नांडीस और राजेश फलदेसाई के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की थी।

विज्ञापन


चोडानकर ने याचिका में मांग की थी कि विधानसभा अध्यक्ष संविधान के अनुच्छेद 191 के साथ दसवीं अनुसूची के पैरा-दो के तहत आठ विधायकों को इस आधार पर अयोग्य घोषित करें कि उन्होंने मूल पार्टी (कांग्रेस) की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ दी थी। इन विधायकों ने कांग्रेस के टिकट पर गोवा विधानसभा के लिये चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इस मामले में मूल राजनीतिक दल का कोई वैध विलय नहीं है।

अधिवक्ता अभिजीत गोसावी के जरिये दायर याचिका में कहा गया कि यह निर्विवाद तथ्य है कि प्रतिवादी वर्तमान विधानसभा के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रूप में विधिवत निर्वाचित हुए थे और अब भारतीय जनता पार्टी से संबद्ध हैं। याचिका में दलील दी गई थी कि मामले में कोई वैध विलय नहीं था, क्योंकि राजनीतिक दल के विलय के लिए जरूरी दो तिहाई सदस्यों की सहमति की दोहरी आवश्यकता पूरी नहीं हुई थी।
विज्ञापन


याचिका में कहा गया कि संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा-चार में किसी राजनीतिक दल का विधायक दल में विलय करने की बात नहीं कही गई है। ऐसा विलय संविधान की 10वीं अनुसूची के उद्देश्य के विपरीत है। मौजूदा मामले में इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि मूल राजनीतिक दल (कांग्रेस) का विलय नहीं हुआ है।

आठ विधायकों का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता पराग राव ने दलील दी कि अध्यक्ष ने 14 सितंबर 2022 को एक पत्राचार के माध्यम से कहा कि आठ विधायकों ने कांग्रेस विधायक दल का भाजपा में विलय करने का प्रस्ताव पारित किया है। राव ने आगे कहा कि भाजपा ने इस विलय को स्वीकार कर लिया है, क्योंकि उसने इनमें से कुछ विधायकों को राज्य सरकार में मंत्री बनाया है।

अध्यक्ष तावड़कर ने उनकी याचिका खारिज करते हुए फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि निर्वाचित सदस्य की मूल राजनीतिक पार्टी का किसी अन्य राजनीतिक पार्टी में विलय होने पर निर्वाचित सदस्य को किसी भी स्थिति में अयोग्यता का सामना नहीं करना पड़ेगा, यानी चाहे वह विलय के साथ जाना चाहे या उससे असहमत हो। तावड़कर ने फैसला सुनाया कि विलय के मामले में दलबदल के आधार पर अयोग्यता लागू नहीं होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें